अधिकारियों ने प्रमाणपत्र के एआई या अन्य तकनीकी माध्यम से तैयार किए जाने की आशंका जताई
सिविल अस्पताल में पासपोर्ट कार्यालय से जांच के लिए आए दस्तावेज, हुआ खुलासा
रुड़की। विदेश जाने की चाह में पासपोर्ट बनवाने के लिए जमा कराए गए जन्म प्रमाणपत्र की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। बृहस्पतिवार को देहरादून स्थित पासपोर्ट कार्यालय से सत्यापन के लिए सिविल अस्पताल रुड़की भेजे गए जन्म प्रमाणपत्र की जांच की गई तो अस्पताल के अभिलेखों में उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच के दौरान प्रमाणपत्र के प्रारूप में भी गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों ने प्रमाणपत्र के एआई या अन्य तकनीकी माध्यम से तैयार किए जाने की आशंका जताई है।
जानकारी के अनुसार, देहरादून पासपोर्ट कार्यालय की ओर से प्रेम ठाकुर के नाम से जारी जन्म प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए सिविल अस्पताल स्थित प्रमाणपत्र केंद्र भेजा गया था। प्रमाणपत्र में जन्मतिथि वर्ष 1978 दर्ज थी। अस्पताल के कर्मचारियों ने जब प्रमाणपत्र पर दर्ज विवरण और संख्या का मिलान अभिलेखों से किया तो उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठे और जांच में उसे फर्जी पाया गया।
सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि देहरादून पासपोर्ट कार्यालय से जन्म प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए आया था। प्रमाणपत्र पर वर्ष 1978 की जन्मतिथि दर्ज थी, लेकिन उस समय इस प्रारूप में प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जाते थे। अस्पताल के अभिलेखों में भी प्रमाणपत्र का विवरण नहीं मिला। उन्होंने बताया कि जांच में प्रमाणपत्र एआई या अन्य तकनीकी माध्यम से तैयार किया गया प्रतीत होता है।