शहर और आसपास के बैंकों में रविदास जयंती के कारण सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश उपभोक्ताओं ने बैंकों की ओर रुख नहीं किया। अब शनिवार और रविवार की बंदी के बाद सोमवार को ही बैंक खुलेंगे। इसके साथ ही एक बार फिर लोगों को नगदी संकट का सामना करना पड़ सकता है।
नोटबंदी के तीन माह बाद भी अधिकांश बैंकों में नगदी का टोटा बना हुआ है। हाल ही में आरबीआई की ओर से रुड़की और लक्सर एसबीआई करेंसी चेस्ट को 50-50 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इसके बाद शुक्रवार तक बैंकों में लोगों को राहत मिली, हालांकि एटीएम में नगदी की किल्लत बनी रही। एसबीआई रुड़की की ओर से शहर और आसपास के 30 एटीएम के लिए दो बार में 21 करोड़ रुपये जारी किए गए, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुए। शुक्रवार को एक बार फिर अधिकांश एटीएम खाली रहे। हालांकि बैंकों में शुक्रवार को नगदी मिलने से लोगों को राहत मिली, लेकिन रविदास जयंती की छुट्टी के कारण कम ही उपभोक्ताओं ने बैंकों का रुख किया। एसबीआई मुख्य शाखा के स्पेशल असिस्टेंट वीके गुप्ता का कहना है कि शुक्रवार को आम दिनों की अपेक्षा बैंक में कम भीड़ रही। फिलहाल नगदी का संकट नहीं है, लेकिन अब एटीएम को कैश देना संभव नहीं है। ऐसे में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।