एक किसान ने गन्ना पर्यवेक्षक पर उसके बंद पड़े कृषक कोड का फर्जी तरीके से प्रयोग कर पैसे निकालने का आरोप लगाया है। किसान के पास समिति की ओर से पैसा वसूली नोटिस पहुंचा तो इसकी जानकारी मिली। किसान ने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक से शिकायत की है।
गन्ना समिति हर किसान को एक विशेष कृषक कोड जारी करती है। कृषक कोड के माध्यम से किसान अपना गन्ना शुगर मिल में सप्लाई करते हैं। कोड पर समिति किसानों को खाद आदि भी उधार उपलब्ध कराती है। क्षेत्र के बादशाहपुर गांव निवासी किसान सुखबीर सिंह ने ने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक प्रदीप कुमार वर्मा को पत्र भेजकर बताया कि उन्हें कृषक कोड 16130 जारी किया गया है। वर्ष 2006-07 से वह इस कोड पर लेनदेन करते आ रहे हैं। समिति द्वारा पहले उन्हें 16125 कृषक कोड जारी किया गया था। वर्ष 2006-07 से उन्होंने इसपर लेनदेन बंद कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में तत्कालीन गन्ना पर्यवेक्षक ने फर्जी तरीके से उनके बंद पड़ी कृषक कोड संख्या का इस्तेमाल कर चेकबुक जारी कराकर उनके खाते से रकम निकाल ली। मामले की जानकारी उन्हें तब मिली जब गन्ना समिति की ओर से 58606 रुपये की वसूली का नोटिस घर भेजा गया। उन्होंने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की। उधर, प्रदीप कुमार वर्मा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। वहीं, संबंधित गन्ना पर्यवेक्षक का कहना है कि चेकबुक किसान के ही पास है और चेक पर किसान के ही हस्ताक्षर हैं।