विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जिले में इंस्पेक्टर और थानेदारों की कुर्सियां खिसकनी तय हैं। माना जा रहा है कि मतगणना खत्म होने के बाद जिले में बड़े स्तर पर बड़े स्तर पर तबादले होंगे। इस बीच कई इंस्पेक्टरों और थानेदारों को नई जिम्मेदारी मिलेगी तो कई की कुर्सियां भी छिन सकती हैं। कुर्सी लेने और बचाने के लिए विभाग में सिफारिशों का दौर शुरू हो गया है।
विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेशभर में आठ जनवरी को आचार संहिता लागू हो गई थी। इसके साथ ही प्रदेश में सभी विभागों में तबादलों पर रोक लग गई थी। दस मार्च को मतगणना होनी है। मतगणना के तुरंत बाद आचार संहिता हट जाएगी। आचार संहिता हटने का सबसे अधिक असर पुलिस विभाग पर नजर आएगा। माना जा रहा है कि आचार संहिता हटते ही जिले में पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल होगा। इसके लिए अभी से ही तैयारी की जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि जिले में कई पुलिस अधिकारियों से लेकर इंस्पेक्टर और थानेदारों के बड़े स्तर पर तबादले किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इंस्पेक्टरों, थानेदारों और दरोगाओं के तबादले होने तय हैं। ऐसे में कई इंस्पेक्टरों और थानेदारों की कुर्सियां छिनेंगी तो जो काफी लंबे समय से एसएसपी कार्यालय में चार्ज मिलने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें नई जिम्मेदारी मिलेगी।
दरोगा और सिपाही भी आएंगे जद में
आदर्श आचार संहिता खत्म होने के बाद जिलेभर में कई दरोगाओं और सिपाहियों के भी तबादले तय हैं। दरअसल, आचार संहिता लागू होने के बाद कई दरोगाओं और सिपाहियों ने अपने तबादले रुकवा लिए थे। माना जा रहा है कि इन दरोगाओं और सिपाहियों को अब मूल तैनाती पर जाना पड़ेगा। वहीं, कई दरोगाओं और सिपाहियों ने फिर तबादला रुकवाने के लिए सिफारिश लगानी शुरू कर दी है।
चालकों के भी होंगे तबादले
जिलेभर में पुलिस की सरकारी गाड़ियों पर पिछले कई वर्षों से चालकों की तैनाती है। इंस्पेक्टर, थानेदार, दरोगा और पुलिसकर्मियों के तबादले होते रहे हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से एक ही कोतवाली और थानों में जमे कई चालकों के तबादले नहीं हुए। जबकि, इन पर कई बार लेनदेन के आरोप भी लगे हैं। बावजूद इसके यह वहीं जमे हुए हैं। इस बार कई चालक भी तबादले की जद में आ सकते हैं।