केंद्र सरकार के पांच सौ और हजार के नोट बंद करने के फैसले ने काला धन जमा करने वालों को तो तगड़ा झटका लगा लेकिन आम जनता को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सुबह होते ही बड़े नोटों के बंद होने का असर दिखाई दिया।सभी जगह सन्नाटा पसरा रहा। पिरान कलियर में बड़े नोट लेने से इंकार करने के चलते सैकड़ों जायरीनों के सामने खाने पीने का संकट खड़ा हो गया। शहर से लेकर देहात तक बड़े नोटों का चलन थम गया । लोगों ने मोदी सरकार के इस कदम को सराहा साथ ही इसे जल्दबाजी में बिना समाधन के उठाया गया कदम भी बताया।
लाइन में लगे रहे, नहीं मिला टिकट
रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन काउंटर और टिकट विंडो पर खुले पैसे खत्म होने के चलते लाइन में खड़े यात्री टिकट से वंचित रह गए। यही नहीं बड़े नोटों के चलते टीटी भी बेटिकट यात्रियों की रसीद काटने से कतराते रहे। सब कुछ रामभरोसे चलता दिखाई दिया। दोपहर करीब 11 बजे तक तो टिकट मिले, लेकिन इसके बाद खुले पैसे न होने के चलते टिकट मिलने में कठिनाई होने लगी। लोगों की टिकट दे रहे कर्मचारियों से कहासुनी होती रही। लोग बिना टिकट लिए ही चले गए। कार्यवाहक स्टेशन अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि आला अधिकारियों से खुले पैसे का इंतजाम कराने को कहा गया है। जल्द ही व्यवस्था हो जाएगी।
अमीरों के चेहरे मुरझाए, गरीब खुश
मोदी सरकार के फैसले के बाद जहां अधिकांश अमीर लोगों के चेहरे मुरझा गए हैं, वहीं मध्यम और निम्र वर्गीय लोगों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी। जिनके पास कालाधन नहीं है, उनका यही कहना था कि मोदी सरकार ने यह बहुत अच्छा फैसला लिया है। हालंाकि व्यापारी वर्ग व्यापार में मंदी को लेकर कुछ हतोत्साहित भी दिखाई दिए।
गृहणियों ने निकालकर दिया कालाधन
शायद लोगों के जीवन में यह पहली बार ही हुआ होगा कि गृहणियों ने अपने पास जमा पूंजी का खुलासा किया हो। बुधवार को यह घर-घर की कहानी बन गई। बाजारों में पहुंचे दुकानदारों ने भी एक दूसरे से पूछा कि उन्हें कितनी जमा पूंजी मिली है। यही नहीं सोशल साइटों पर भी इस तरह के जुमले वायरल होते रहे।
भूख से बिलखते रहे बच्चे, जायरीन बेबस
कलियर दरगाह साबिर पाक की जियारत करने आए लोगों के हाल बेहाल हो गए। कलकत्ता के टेंगरा सियालदा के जायरीनों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। आसमां, रजिया, रुखसाना, जुबेदा, बेबी ने बताया कि वे नौ लोग कलियर में छह नवंबर से आए हुए थे। जिसमें तीन बच्चे भी साथ है। आज सुबह नाश्ता करने के लिए दुकान पर गए तो दुकानदार ने पांच सौ का नोट लेने से मना कर दिया । छोटे छोटे बच्चों ने सुबह से नाश्ता भी नहीं किया है। बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं गुजरात के सूरत से आए असगर रेतीवाला ने बताया कि चार दिन पहले कलियर साबिर पाक की जियारत करने आए थे साथ में पत्नी और दो बच्चे भी हैं। इनका कहना है कि अब घर कैसे जाए, क्या खाएं। दुकानदार ने पांच सौ के नोट लेना बंद कर दिया है। पंजाब के मलेर कोटला से आए हाजी इसहाक ने बताया कि सुबह से नास्ता नही किया है कोई दुकानदार पांच सौ का नोट नही ले रहा है। इन सभी जायरीनों ने कहना था कि भारत सरकार के इस फैसले से हम सब नाखुश है। भारत सरकार को पहले कुछ समय देना चाहिए था। एटीएम भी बंद है। अब जायरीनो को 500 के नोट को 300 में देने को मजबूर होना पड़ रहा है।
चिकित्सक के इंकार से, मरीजों का हंगामा
रुड़की। बुधवार शाम को एक चिकित्सक के क्लीनिक पर मरीजों ने जमकर हंगामा काटा। चिकित्सक ने क्लीनिक पर पर्चा लगा दिया था कि 500 और 1000 के नोट सरकार ने बंद कर दिए हैं। इसलिए नोट स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस बात से नाराज होकर मरीजों ने जमकर हंगामा काटा। साथ ही सीएमओ और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से भी शिकायत की।
शहर में स्थित एक क्लीनिक पर मरीज उपचार के लिए पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारी ने मरीजों को बताया कि चिकित्सक ने 500 और 1000 रुपये का नोट लेने से मना लिया है। इसलिए यदि चिकित्सक को दिखाना है तो खुले पैसे दें। चिकित्सक पर्चा चिपकाकर यह बात लिखी हुई है। इस पर मरीजों ने जमकर हंगामा काटा। मरीजों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और सीएमओ से मामले की शिकायत की। हालांकि चिकित्सक ने स्पष्ट रुप से कह दिया कि वह 500 और 1000 रुपये का नोट नहीं लेगा।
धनबल के सहारे चुनाव जीतने की तैयारी को झटका
बड़े नोट के बंद होने से धनबल के सहारे चुनाव जीतने की तैयारी कर रहे नेताओं को भारी झटका लगा है। वहीं सूत्रों की माने तो खनन कारोबारी और प्रापर्टी डीलिंग में करोड़ों के वारे न्यारे कर रहे बिल्डरों की भी सांसे फूल गई है। वहीं फिरौती और लूट डकैती के सहारे धन जुटाने वाले बदमाशों का नेटवर्क भी ध्वस्त होने की उम्मीद है।
धनबल के सहारे टिकट खरीदने और मतदाताओं पर करोड़ों लुटाकर जीतने की रणनीति बना रहे नेताओं के अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मोटी रकम को घर में सुरक्षित रखना कइयों के लिए महंगा साबित हो गया है। इसके बाद अब बिना पैसे के इमानदारी के साथ चुनाव होने की उम्मीद जगी है। वहीं इससे अपराध पर भी अंकुश लगने की आशा जताई जा रही है। बड़े नोट बंद होने के बाद अब कुछ समय के लिए फिरौती, लूट, डकैती जैसी घटनाओं से पुलिस को आराम मिल सकता है। बड़े नोटों के बंद होने का असर खुदरा व्यापारियों से ज्यादा प्रोपर्टी व्यवसाय करोड़ों का दांव लगाने वाले बिल्डरों सहित खनन कारोबारियों पर पड़ता दिख रहा है। जानकारों की माने तो खनन माफिया और सरकार के बीच मध्यस्थता की कड़ी का काम कर रहे दलालों को सरकार के इस कदम से तगड़ा झटका लगा है।