बुधवार की शाम पांच बजे के करीब बुधबाजार से एक युवक को कुछ लोग जबरन उठा ले गए। 24 घंटे बाद भी युवक का सुराग नहीं लग सका है। वहीं इस संबंध में स्थानीय और जिला पुलिस नेे जानकारी से इनकार किया है। चरचा है कि वह एनआईए की टीम या फिर दूसरे राज्य की पुलिस हो सकती है। मामले में युवक के पिता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है।
जानकारी के अनुसार पाडली गुज्जर तेल्लीवाला निवासी मोहम्मद सलीम बुधबाजार में जूते-चप्पल की दुकान लगाता है, जबकि उसका बड़ा बेटा आरिफ-21 राजमिस्त्री का काम करता है। बुधवार की शाम सलीम किसी काम से घर चला गया और उसने अपने बेटे आरिफ को दुकान पर बैठा दिया। इसी दौरान पांच बजे के लगभग एक गाड़ी आकर वहां रुकी और उसमें सवार लोगों ने जबरन आरिफ को काबू कर लिया। भीड़ जमा होते ही गाड़ी सवार लोग खुद को पुलिस बताकर उसे गाड़ी में डालकर रवाना हो गए। आसपास के लोगों ने युवक के पिता को मामले की जानकारी दी।
मौके पर पहुंचे परिजनों ने दोनों कोतवाली के चक्कर काटे, लेकिन स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने उसे ले जाने वालों की कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया। न ही इस संबंध में कार्रवाई करने की जहमत उठाई। इससे स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यही नहीं एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल और एसएसपी राजीव स्वरूप ने भी मामले की जानकारी होने से इनकार कर दिया, हालांकि एसएसपी ने कहा कि इस तरह की सूचना आई है और जांच कराई जा रही है। दूसरी ओर युवक के न मिलने से परेशान पिता पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। बृहस्पतिवार को उसने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है। साथ ही बेटे को झूठे मामले में फंसाने की आशंका जताई है। घटना को लेकर शहर में तरह-तरह की चरचा की जा रही है। कुछ लोग इसे एनआईए की कार्रवाई बता रहे हैं तो कुछ दूसरे राज्यों की पुलिस करार दे रहे हैं। फिलहाल युवक को जबरन ले जाने पर संशय बरकरार है।