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ल भराव की समस्या दूर करने को पांच साल भी पड़ गए कम

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रुड़की। बरसात में डूबती रुड़की की समस्या को दूर करने के लिए निगम की सरकार को पांच साल का वक्त भी कम पड़ गया। कार्यकाल पूरा होने बाद अब आने वाली बरसात में फिर से आधी से अधिक रुड़की जलभराव की समस्या झेलेगी। दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। चिंताजनक यह है कि अभी तक निगम न ध्वस्त पड़े ड्रेनेज सिस्टम को कैसे सुधारा जाए। इसका कोई प्लान तैयार कर पाया है और न ही बोर्ड बैठक में ड्रेनेज सिस्टम तैयार करने के लिए टोपोग्राफिकल मैप और जीआईसी मैप तैयार करने की योजना को अमलीजामा पहना पाया है।
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इंजीनियरों का शहर माने जाने वाले रुड़की में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त है। यह जानकार हर किसी को हैरत होती है। एक ओर जहां रुड़की नगर निगम स्वच्छता के मामले में प्रदेश भर में पहली रैंकिंग हासिल करने की जद्दोजहद कर रहा है वहीं दूसरी ओर जल निकासी की इस बड़ी समस्या से उबर नहीं पा रहा है। हालांकि अधिकारी कह रहे हैं कि इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन बरसात को दो माह का समय ही शेष रह गया है और अभी तक धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा है। जिससे साफ हो रहा है कि एक बार फिर से रुड़की में जल भराव की समस्या लोगों को परेशान करेगी। नगर निगम के बीते पांच साल के कार्यकाल में हर बोर्ड बैठक में नालों की समस्याओं पर चर्चा होती रही है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। बोर्ड की आखिरी बैठक में निगम अधिकारियों की ओर से इस समस्या से निपटने के लिए दो प्रस्ताव रखे गए थे। जिन्हें पास तो कर दिया गया लेकिन इस पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। इनमें एक प्रस्ताव टोपोग्राफिकल मैप और दूसरा प्रस्ताव जीआईएस मैप तैयार करने को लेकर था। टोपोग्राब्कल मैपिंग में शहर में नालों और सड़क के ढलान के बाबत ब्यौरा एकत्र करना था। क्योंकि शहर में बने ज्यादातर नालों का पानी आगे जाकर ऊंचाई होने के चलते ठहर जाता है। जब बरसात होती है तो यह पानी वापस लौटकर जलभराव की समस्या पैदा करता है। वहीं दूसरे प्रस्ताव जीआईएस मैपिंग का था, जिसके तहत शहर में नालों की वास्तविक स्थिति के आधार पर मैप तैयार होना था। अभी तक ये दोनों काम शुरू नहीं हो पाए हैं। लिहाजा इस बरसात एक बार फिर से जल निकासी को लेकर बुरे हालात पैदा होने के आसार बन गए हैं।
करोड़ों की डीपीआर भी शासन में फांक रही धूल
- करीब दो साल पूर्व में शहर में 15 नए नालों के निर्माण के लिए शासन को करीब पांच करोड़ की डीपीआर बनाकर भेजी गई थी। लेकिन इस डीपीआर पर आज तक बजट स्वीकृत नहीं हो सका है। सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि इस डीपीआर को स्वीकृति मिलती है तो शहर में जल निकासी की समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल शहर में पनियाला रोड पर बने नाले की आगे जाकर निकासी नहीं होने की समस्या पैदा हो रही है। इसके चलते सुभाषनगर, शास्त्रीनगर, शिवपुरम समेत कई कालोनियों में जल भराव की समस्या पैदा हो जाती है। इसके अलावा कृष्णानगर और खंजरपुर में भी यह समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में झबरेड़ा विधायक की ओर से सलेमपुर से रामनगर तक नाले जोड़ने की योजना का शुभारंभ किया गया है। यह काम पूरा होता है तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो सकता है।
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मेयर के जाते ही विधायक ने संभाल ली कमान
रुड़की। मेयर का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के अगले ही दिन शनिवार को विधायक प्रदीप बत्रा ने निगम में बने मेयर के कक्ष में पहुंचे। यहां उन्होंने अधिकारियों की बैठक लेकर शहर में जल भराव की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अभी से नाल े नालियों की सफाई कराने के लिए कहा। साथ ही शहर में टूटी सड़कों को जल्द से जल्द ठीक कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो भी काम अधूरे हैं, उनके प्रस्ताव बनाकर दें ताकि विधायक निधि से रुके हुए कार्यों को पूरा कराया जा सके। विधायक की सक्रियता ने निगम के सभी अधिकारियों केे आश्चर्य में डाल दिया। इस दौरान भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुशील त्यागी ने साफ सफाई के साथ दवा आदि के छिड़काव का सुझाव दिया। इस दौरान मुख्य नगर आयुक्त अशोक पांडेय और सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट के अलावा निगम के अन्य अधिकारी एवं स्टाफ भी मौजूद रहा।
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बरसात में यहां सड़क और घर हो जाते हैं जलमग्न
- बीटी गंज बाजार
- पश्चिमी अंबर तालाब
- पूर्वी अंबर तालाब
- नेहरू नगर, आजाद नगर, सुभाषनगर, गांधी नगर
- गणेशपुर
-पुरानी तहसील
- सिविल लाइंस
- रामपुर में हाईवे पर
- माहिग्रान और इमली रोड
कोट -
ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने के लिए योजना पर काम किया जा रहा है। टोपोग्राफिकल और जीआईएस मैपिंग के लिए टेंडर निकालकर जल्द ही इस पर काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा।
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-- चंद्रकांत भट्ट, सहायक नगर आयुक्त
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