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शहीदों की कुर्बानी नहीं भुलायी जा सकती- प्रदीप बत्रा

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रुड़की। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकार संगठन की ओर से सुनहरा गांव स्थित शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम और आयोजित कवि गोष्ठी में शहीदों का भावपूर्ण स्मरण किया गया। इस दौरान विधायक प्रदीप बत्रा ने कहा कि वर्ष 1822 के शहीदों की कुर्बानी को कोई कभी नहीं भुला सकता।
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संस्कार भारती, आर्य समाज, हिंदी साहित्योदय, कर्मयोगी सेवा समिति, शहीद भगत सिंह युवा मंच और ज्योतिबा फुले मंच के संयुक्त तत्वावधान में गांव स्थित शहीद स्मारक पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और लोगों ने शहीदों का याद किया। इस दौरान मुख्य अतिथि विधायक प्रदीप बत्रा ने कहा कि शहीदों की कुर्बानी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उस समय लोगों ने खुलकर अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया था, जिसकी वजह से अंग्रेजों ने कई स्थानीय लोगों को फांसी दी और कई को गोलियों से भूना। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के जिलाध्यक्ष देशबंधु ने बताया कि संगठन हर शहीदों की याद में इस गांव में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करता है।
यज्ञ के बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवि ओमपाल सिंह ने अपनी कविता में ‘यह बेला बलिदानी व्यर्थ नहीं जाने पाए, अमर शहीदों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाने पाए, बहनों की आंखों का पानी व्यर्थ नहीं जाने पाए, लहू बहा जो हिंदुस्तानी व्यर्थ नहीं जाने पाए....’। कवि श्रीकांत ने अपनी कविता में ‘भले ही दीप से पूजा तू आठों याम मत करना, मिले कोई मोहल्ले में तो राधे-श्याम मत करना, नमन करना या मत करना, पर शहीदों की शहादत को कभी बदनाम मत करना’। सम्मेलन में अनिल शर्मा, राजकुमार उपाध्याय, किसलय, हरिप्रकाश, सुमंत आर्य, रामवीर सिंह, अजय त्यागी, मधुरका सक्सेना, सुरेंद्र कुमार, हरपाल सिंह, जवाहर लाल, अनुज सैनी, विरम गोस्वामी, अलका घनशाला, शालिनी जोशी, केपी सिंह, पराग चतुर्वेदी, नरेश राजवंशी, गौरव गोयल आदि मौजूद रहे।
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वट वृक्ष पर 16 को दी थी फांसी
रुड़की। वर्ष 1822 में हरिद्वार और आसपास के गुर्जरों और रांगड़ों ने अंग्रेजों को फसल का टैक्स देना बंद कर दिया था। इस दौरान उन्होंने अंग्रेजी फौजों पर भी हमला किया और टकसाल लूटने लगे थे। स्थानीय लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भड़कता देख अंग्रेजी शासकों ने सुल्तानपुर के पास बंजारा गांव में नौ लोगों को गोलियों से भून डाला था। स्थानीय गुर्जरों और रांगड़ों में दहशत फैलाने के लिए 16 लोगों को सुनहरा स्थित वट वृक्ष पर लोहे की शंकल से लटकाकर फांसी दी थी। बताया जाता है कि फांसी देने के बाद शव को कई दिन तक इस वट वृक्ष पर ही लटकाए रख गए। यही वजह है अब भी इस वृक्ष पर शंकल के निशान दिखते हैं। अब इस स्थल को शहीद स्थल के रूप में विकसित किया गया है। हर साल यहां शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

शहीद दिवस मनाया
रुड़की। स्थानीय युवाओं की ओर से शक्ति विहार रेलवे कॉलोनी मे शहीद दिवस मनाया गया। स्थानीय निवासी सुखवेंद्र वाल्मीकि ने बताया कि मेरठ में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित जो विवरण हैं उसमें मातादीन वाल्मीकि का नाम सबसे ऊपर है। जबकि मंगल पांडे का नाम दूसरे नंबर है। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर पर रोहित, रजनीश बिरला आदि उपस्थित रहे।
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