फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साहब! अपनों पर भी तो कार्रवाई करो

विज्ञापन
विज्ञापन
रुड़की। एडीजी (कानून व्यवस्था) के आदेशों का अनुपालन कराने सड़क पर उतरी पुलिस न तो अपने महकमे में पदनाम प्लेट और स्टीकर लगे वाहन दौड़ा रहे अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कर रही है और न उन नेताओं पर जो खुलेआम पदनाम का बोर्ड लगाकर वाहन दौड़ा रहे हैं। कोतवाली के भीतर पुलिसकर्मियों के वाहनों पर ही नेम प्लेट और स्टीकर लगे हुए हैं। ऐसे में एक मई से शुरू हुए इस अभियान में एडीजी के आदेशों का गंभीरता से पालन होता नहीं दिख रहा है। जबकि पुलिस ने बृहस्पतिवार को 150 वाहनों की नेम प्लेट और स्टीकर उतारकर 100-100 रुपये के चालान काटे।
विज्ञापन

गौरतलब है कि विगत दिनों एडीजे (कानून व्यवस्था) अशोक कुमार की ओर से एसएसपी हरिद्वार को पदनाम प्लेट और स्टीकर आदि लगाकर दौड़ रहे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसमें पदनाम, संस्था का नाम, लोगो, धार्मिक चिह्न आदि हटाने के आदेश हैं। इसके बाद एसएसपी के आदेश पर स्थानीय पुलिस ने एक मई से अभियान शुरू किया हुआ है। इसमें पहले सात दिन लोगों को जागरूक किया गया था जबकि बुधवार से कार्रवाई शुरू कर दी है। बृहस्पतिवार को पुलिस के अभियान का जायजा लिया तो सामने आया कि महज आम नागरिकों पर पुलिस का जोर चल रहा है। जबकि नेताओं की कारों और बाइकों पर हाथ नहीं डाल रही है। पुलिस का यह अभियान मात्र मिलिट्री चौराहे पर सक्रिय रूप से चल रहा है। यहां ज्यादातर लोग बाहर से आने वाले ही पहुंचते हैं। जबकि शहर के अंदर भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दलों के पदाधिकारी अपने-अपने वाहनों पर बोर्ड और हूटर तक लगाकर घूम रहे हैं, लेकिन पुलिस का इन पर कोई जोर नहीं है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि कोतवाली में पुलिस के वाहनों पर एडीजी के आदेश का असर नहीं दिख रहा है। कोतवाली में कई निजी वाहनों पर पुलिस साइन के स्टीकर लगे हुए हैं। इससे लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस के अभियान की आंखों देखी
पुलिस की ओर से मिलिट्री तिराहे पर वाहनों पर लगी पदनाम प्लेट हटाने के लिए जो कार्रवाई की वह महज औपचारिकता भर रही। कार्रवाई के दौरान एक बाइक पर आर्मी लिखे होने पर उसे मिटाया गया, लेकिन उस वाहन के पीछे ब्रेक लाइट पर काला कर उस पर बनाए एप्पल का लोगो नहीं हटाया। कार्रवाई के दौरान बोलरो पर एक लोगो बनाया था, इस कार में क्षमता से अधिक लोग बैठे हुए थे, लेकिन पुलिस की ओर से उस गाड़ी से न तो लोगो हटाया न ही ओवरलोडिंग में उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। एक बिना नंबर की दूधिया की बाइक पुलिस के सामने से गुजरी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। पुलिस के सामने से गुजरी ओवर स्पीड बाइक
विज्ञापन

पुलिस जब मिलिट्री चौक पर वाहनों की नेम प्लेट को लेकर अभियान चला रही थी, उसी बीच मंगलौर की ओर से बस अड्डे की ओर जा रही एक बाइक ओवर स्पीड में सामने से निकल गई, लेकिन पुलिस ने इसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। जबकि वायरलैस पर संदेश प्रसारित कर उसे आगे पकड़ा जा सकता था। इसके अलावा सिविल लाइंस कोतवाली में खड़ी बाइक पर कार्रवाई नहीं की। इस बाइक पर पुलिस का लोगो और उसके ऊपर मोटे अक्षरों में दीवान जी लिखा है। बाइक पर आगे और पीछे नंबर तक नहीं लिखा गया है।
...तो पुलिस के इशारे पर चल रहे जुगाड़ वाहन
रुड़की। शहर और उससे सटे इलाकों में बाइक और स्कूटर के इंजन को रेहड़े पर लगाकर उससे जुगाड़ वाहन बनाए जा रहे हैं। इन वाहनों से हाईवे और शहर का आंतरिक यातायात प्रभावित होता है। क्षमता से ज्यादा सामान भरा होने से इनसे अक्सर जाम भी लग रहा है। मलकपुर चुंगी, बीटीगंज, जादूगर रोड, मिलिट्री तिराहा, बीएसएम तिराहा, रामपुर चुंगी, भगवानपुर, मंगलौर, झबरेड़ा आदि इलाकों में सीमेंट सरिया स्टोरों के बाहर जुगाड़ वाहन खड़े रहते हैं। इन वाहनों से सीमेंट सरिया ढोने का काम किया जाता है। कई दुकानदारों ने भी गोदाम से दुकान तक माल ढोने के लिए जुगाड़ वाहन खरीद रखे हैं। रामपुर चुंगी में 20 हजार में जुगाड़ वाहन मिल जा रहा है। इस समय शहर में करीब 500 जुगाड़ वाहन चल रहे हैं, लेकिन पुलिस इन पर कभी कार्रवाई नहीं करती। इससे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कहीं ये वाहन पुलिस के इशारे पर ही तो संचालित नहीं हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें