रुड़की। नगर निगम के अफसरों की लापरवाही और समय से निर्णय न लेने की क्षमता का खामियाजा शहर को भुगतना पड़ रहा है। 14वें वित्त के मद में नगर निगम को विकास कार्य कराने के लिए मिले पांच करोड़ रुपये पांच दिन बाद लैप्स हो जाएंगे लेकिन नगर निगम प्रशासन इसका सदुपयोग नहीं कर सका। पैसा होते हुए भी शहर के विकास कार्य हो नहीं पाए । क्षेत्र की जनता को नए साल के तोहफे के स्थान पर नगर निगम की ओर से यह मायूसी का तोहफा दिया गया है।
प्रदेश सरकार की ओर से नगर निगम को साल के शुरू में शहर के विकास के काम कराने के लिए 14वें वित्त के अंतर्गत पांच करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इस धनराशि से शहर में सड़कों का निर्माण, स्ट्रीट लाइटें लगाने समेत कई काम कराए जा सकते थे लेकिन नगर निगम प्रशासन की ओर से इस बारे में समय से कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्वच्छता मिशन को प्राथमिकता में शामिल कर उसे सिरे चढ़ाने में जुटे नगर निगम प्रशासन के अधिकारी न तो कराए जाने वालों कामों को चिह्नित कर सका और न ही इनके लिए टेंडर कराए गए।
शासन की गाइड लाइन के अनुसार इस पैसे का उपयोग आगामी 31 दिसंबर तक ही किया जा सकता है। इसके बाद यह राशि लैप्स हो जाएगी। ऐसे में पार्षद जहां विकास कार्य कराने के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं वहीं दूसरी तरफ नगर निगम प्रशासन पैसा खाते में होते हुए भी उसका सदुपयोग नहीं कर पा रहा है। पांच करोड़ की धनराशि को लैप्स होने में केवल पांच दिन शेष बचे हैं।
पार्षदों का प्रदर्शन, दिया ज्ञापन
रुड़की। नगर निगम प्रशासन और मेयर पर शहर के विकास के लिए गंभीर प्रयास नहीं करने का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने मंगलवार को नगर निगम परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन जानबूझकर विकास कार्यों की अनदेखी कर रहा है। इसी वजह से पैसा होने के बाद भी विकास कार्य नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने नगर आयुक्त के नाम एक ज्ञापन भी दिया साथ ही मेयर और अफसरों के खिलाफ जनता के बीच जाकर आंदोलन करने की चेतावनी दी। पार्षद प्रद्युम्र पोसवाल, अभिषेक चंद्रा, बबली चौधरी, कुसुमलता, दिनेश शर्मा और बेबी खन्ना आदि ने मंगलवार की दोपहर नगर निगम परिसर में पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम प्रशासन शहर की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। जनता जहां विकास कार्यों और समस्याओं का निराकरण नहीं करानेे को लेकर जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रही है वहीं नगर निगम प्रशासन इस तरफ गंभीर नहीं दिख रहा है। नगर निगम में मुख्य नगर अधिकारी के उपलब्ध नहीं होने के कारण सहायक अभियंता को ज्ञापन दिया गया।
कोट
विकास कार्यों में लापरवाही की कोई बात नहीं है। ई टेंडरिंग की प्रकिया काफी लंबी है इस वजह से इसमें ज्यादा समय लगा । जहां तक पैसा लैप्स होने का सवाल है। इसकी अवधि दोबारा बढ़वाने का प्रयास किया जा रहा है।
चंद्रकांत भट्ट, सहायक नगर आयुक्त,