रुड़की। अधिकारियों ने कक्षा आठ तक के वित्तीय सहायता प्राप्त स्कूलों में बोर्ड परीक्षा के लिए अलग से केंद्र व्यवस्थापक नियुक्त करने का फैसला लिया है। अधिकारियों के इस निर्णय का शिक्षक संगठनों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। पदाधिकारियों के विरोध के चलते अधिकारी अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
जिलेभर में वित्त सहायता प्राप्त करीब दो दर्जन माध्यमिक स्कूल हैं। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में बोर्ड परीक्षा के लिए अलग से केंद्र व्यवस्थापक तैनात करने के निर्देश जारी किए हैं। जबकि सामान्यत: केंद्र व्यवस्थापक की जिम्मेदारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के पास ही होती है। विभाग के इस निर्णय को लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया हैं। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डा. अनिल शर्मा ने बताया कि इन स्कूलों में लोक सेवा आयोग तक की परीक्षा सफलतापूर्वक होती रही है। अलग से केंद्र व्यवस्थापक की व्यवस्था से प्रधानाचार्यों की योग्यता पर सवाल खड़ा कर दिया है। कहा कि इस व्यवस्था का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों से वार्ता की जा रही है। व्यवस्था समाप्त नहीं होने पर वह केंद्र व्यवस्थापक को स्कूलों में नहीं घुसने देगे। वहीं दूसरी ओर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रूपेंद्र दत्त शर्मा ने बताया कि पदाधिकारियों का विरोध सामने आया है। जिसे लेकर विचार किया जा रहा है।