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स्कूलों में साइड बुक के नाम पर फिर से खेल शुरू

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अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। शहर के कई नामी-गरामी स्कूलों में साइड बुक के नाम पर फिर से खेल शुरू हो गया है। पिछले दिनों कोर्ट ने स्कूलों को राहत देते हुए एनसीईआरटी के समान मूल्य की साइड बुक लगाने की छूट दी थी, लेकिन स्कूलों ने महंगे प्रकाशन की पुस्तकें ही लागू कर फिर से गोरखधंधा शुरू कर दिया है।
इस वर्ष एनसीईआरटी की पुस्तकों को लागू करने का मामला खासा तूल पकड़ा था। शिक्षा मंत्री अरविंद पांड़े एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू कर अभिभावकों को महंगे प्रकाशन की पुस्तकों से निजात दिलाना चाहते थे, लेकिन इसके प्राइवेट स्कूलों ने इसका खुलकर विरोध किया था। शिक्षा मंत्री के बैकफुट पर नहीं आने पर प्राइवेट स्कूलों ने कोर्ट का सहारा लिया था। प्राइवेट स्कूलों का दावा था कि एनसीईआरटी की बुकों में संपूर्ण ज्ञान नहीं है। जिसके चलते साइड बुक लगाना जरूरी है। इसके बाद कोर्ट ने स्कूलों को राहत देते हुए प्राइवेट स्कूल साइड बुक लगाने की अनुमति दी थी। हालांकि उसकी कीमत एनसीईआरटी की पुस्तकों से ज्यादा न होने के बारे में भी हिदायत दी थी। जिसके बाद एक बार फिर स्कूलों में साइड बुक के नाम पर खेल शुरू हो गया है। शहर के कई मशहूर स्कूलों ने साइड बुक अनिवार्य कर दी है। इन साइड बुक की कीमतें एक सौ रुपयों से लेकर 250 रुपये तक है, जबकि एनसीईआरटी की किताबों की कीमत 50 व 60 रुपयों के आसपास है।
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निर्धारित दुकान पर ही मिलेगी किताबें
एनसीईआरटी की किताबें अभिभावक किसी भी दुकान से खरीद सकते है, लेकिन साइड बुक हर स्कूल की निर्धारित दुकान पर ही मिल रही है। इससे साफ है कि कमीशनखोरी का काम फिर से चरम पर है।
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कोर्ट ने आदेश दिए थे कि एनसीईआरटी के दामों वाली सामान्य मूल्य की साइड बुक स्कूल लगा सकते हैं, लेकिन यदि महंगे प्रकाशन की पुस्तकें लगाई जा रही है, तो यह गलत है। शिकायत मिलने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- ब्रह्मपाल सिंह सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक
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