ब्यूरो/अमर उजाला, मंगलौर
जल निर्माण निगम टेस्टिंग के दौरान पाइप लाइन की लीकेज ठीक करने के लिए हाल में बनाई सड़कों को तोड़ रहा है। इससे जहां एक ओर सड़कें कमजोर हो रही हैं, वहीं सड़कों पर लगाया पैसा भी बर्बाद हो रहा है। जल निर्माण निगम के अनुसार पालिका ने पाइप लाइन की टेस्टिंग से पहले ही सड़क बनवा दी। जबकि नगर पालिका का तर्क है कि सड़क बनाने से पहले जल निर्माण निगम से टेस्टिंग को लेकर कई बार पत्र व्यवहार किया गया। इसके बाद लोगों की समस्या को देखते हुए सड़कें बनाई गई। नगर पालिका जल निर्माण निगम से नियमानुसार रोड कटिंग शुल्क वसूलने की बात कह रही है।
दरअसल, जल निर्माण निगम की ओर से नगर में करीब 55 किलोमीटर लंबी पाइप लाइनें बिछाई गई थी। पाइप लाइनें डालने के बाद सड़कें टूट गई थी। ऐसे में लोगों का चलना दूभर हो गया था। इसे देखते हुए लोगों ने सड़क निर्माण की मांग की। लोगों की मांग पर नगर पालिका ने सड़क निर्माण के लिए जल निर्माण निगम से बजट की मांग की। इस पर जल निर्माण निगम के अधिकारियों ने पाइप लाइन की टेस्टिंग के बाद ही सड़क बनवाने की बात कही। उनका तर्क था लाइन टेस्टिंग के दौरान यदि लीकेज हुई तो उसे तुरंत ठीक कर दिया जाएगा। जबकि यदि सड़क बना दी गई तो फिर दोबारा सड़क तोड़कर लीकेज ठीक करनी पड़ेगी। वहीं नगर पालिका ने बिना लाइन टेस्टिंग के ही सड़कों का निर्माण कर दिया। अब जल निर्माण निगम ने लाइन की टेस्टिंग की तो लाइन में लंढौरा मार्ग पर पुलिस चौकी के सामने व मलकपुरा मोहल्ला हलका समेत कई स्थानों पर लीकेज मिली। इन लीकेज को ठीक करने के लिए जल निर्माण निगम नई सड़कों को तोड़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों में भारी रोष है। उनका कहना है कि एक बार सड़क टूटने के बाद अरसे तक ऐसे ही पड़ी रहती है। उनका आरोप है कि दोनों विभागों ने आपसी तालमेल नहीं किया है। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
सड़क बनाने से पहले जल निर्माण निगम से लाइन टेस्टिंग करवाने के लिए पत्र व्यवहार किया गया था। विभाग ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। मजबूरन लोगों की समस्या देखते हुए सड़कें बनवाई गई। विभाग से नियमानुसार रोड कटिंग का शुल्क वसूला जाएगा।
दिलशाद, अध्यक्ष, नगर पालिका
नगर पालिका को सड़क बनाने से पहले ही टेस्टिंग के लिए बता दिया गया था। पालिका ने सड़क बनाने में जल्दबाजी की है। लीकेज ठीक करने के लिए सड़क तोड़ने की मजबूरी है। नियमानुसार सड़क टूटने पर आने वाला खर्च पालिका को दिया जाएगा।
मोहम्मद मिसम, अधिशासी अभियंता, जल निर्माण निगम