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आज से शुरू होगा 40 वार्डों में ओबीसी का सर्वे

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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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सरकार की ओर से दिसंबर के अंत तक नगर निगम के चुनाव की अधिसूचना जारी करने की घोषणा के बाद से और प्रशासनिक स्तर पर चुनावी कसरत तेज हो गई है। इसके तहत 40 वार्डों में आज से ओबीसी सर्वे का काम शुरू हो जाएगा। 178 कर्मचारियों को सर्वे के काम पर लगाया गया है। बुधवार को नगर निगम सभागार में सहायक नगर आयुक्त ने बीएलओ को सर्वे संबंधी दिशा निर्देश जारी किए। दस दिनों में ओबीसी सर्वे पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होगी।
रुड़की नगर निगम के चुनाव लंबित चले आ रहे हैं। निवर्तमान बोर्ड का कार्यालय पूरा हुए करीब सात महीने बीतने को हैं, लेकिन अभी तक चुनाव की अधिसूचना तक जारी नहीं हो पाई है। नगर निगम से रामपुर और पाड़ली गुर्जर को बाहर करने के विरोध में निवर्तमान मेयर यशपाल राणा और कलियर विधायक फुरकान अहमद की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद से निगम का चुनाव तमाम कानूनी दांव पेच में फंसता रहा है। अब सरकार ने विधानसभा में विधेयक पास करने के बाद दोनों गांवों को बाहर करने के साथ ही तीन नए गांव हसन अलीपुर, आसफ नगर और मोहनपुरा को शामिल कर लिया है। इसके बाद निगम के 40 वार्डों की अनंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई।
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जल्द ही अंतिम अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से दिसंबर अंत तक अधिसूचना जारी होने के संकेत मिलते ही निगम प्रशासन चुनाव की तैयारियों में जुट गया है। बृहस्पतिवार से 40 वार्डों में ओबीसी सर्वे शुरू हो जाएगा। बुधवार को सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने सर्वे के लिए 120 बीएलओ, 40 सुपरवाइजरों और 18 रिजर्व कर्मियों को दिशा निर्देश जारी किए। निगम सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने बीएलओ को हर घर का बारीकी से सर्वे करने के बाद रिपोर्ट तैयार करने को कहा। माना जा रहा है कि दस दिन में यह काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मेयर और सभासदों की सीटों पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद ही सरकार चुनावी अधिसूचना जारी करने की स्थिति में होगी। माना जा रहा है कि तय समय सीमा के आसपास ही चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी।
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पिछले सर्वे का पैसा नहीं मिला, अब दोबारा कराई जा रही मेहनत
रुड़की। नगर निगम में पहले रामपुर और पाड़ली गुर्जर गांव को जोड़ते हुए सर्वे का काम कराया गया था। अब इन गांवों को बाहर करने के साथ ही तीन नए गांव शामिल कर लिए गए हैं। चुनाव के मद्देनजर अब जो सर्वे कराया जा रहा है, वह नए सिरे से पूरे नगर निगम क्षेत्र का होगा। इसमें उन पुराने वार्डों का भी दोबारा सर्वे कराया जाएगा, जिनमें सर्वे हो चुका है। पर दिक्कत यह है कि पहले सर्वे करने वाले बीएलओ को अभी तक पैसा नहीं मिला है और अब फिर से उन्हें सर्वे के लिए कहा जा रहा है। बैठक के दौरान कई बीएलओ ने इस पर आपत्ति जताई और पूछा कि दोबारा सर्वे में उनकी मेहनत और समय दोनों लगेंगे। ऐसे में उन्हें सर्वे के लिए दोगुना पैसा मिलना चाहिए। इस पर सहायक नगर अधिकारी चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि जो सर्वे हो चुका है, उस इलाके में दोबारा सर्वे करने में कम मेहनत लगेगी। साथ ही पुराने सर्वे के आधार पर चुनावी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी, लिहाजा पुराने सर्वे के एवज में शासन की ओर से फंड जारी नहीं किया गया है। उन्होंने बीएलओ से शासन के निर्देश पर अग्रिम कार्रवाई करने की बात कही।
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विभाग में ड्यूटी दें या सर्वे करें
बैठक में मौजूद कुछ बीएलओ ने सवाल उठाया कि उन्होंने महज दस दिनों में सर्वे का काम पूरा करना है। साथ ही अपने-अपने विभाग में ड्यूटी भी करनी है। ऐसे में तय सीमा में काम कैसे पूरा होगा। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सवाल का जवाब देते हुए सहायक नगर अधिकारी चंद्रकांत भट्ट ने बताया कि शासन की ओर से विभिन्न विभागों के कर्मियों से सर्वे कराने के निर्देश मिले हैं। संबंधित कर्मी अपने विभाग में ड्यूटी कर आध दिन के बाद सर्वे काम कर सकेंगे।
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मेयर और सभासद सीटों के आरक्षण पर लगी निगाहें
नगर निगम के सीमा विस्तार के बाद वार्डों की संख्या 20 से बढ़कर 40 हो गई है। इससे वार्डों की स्थिति में भी बड़ा परिवर्तन आया है। इस हिसाब से वार्डों में जातीय आंकड़ा बदला तो आरक्षण का क्रम भी बदल सकता है। ओबीसी सर्वे के बाद काफी हद तक स्थिति साफ हो जाएगी और इसके बाद वार्डों समेत मेयर की सीट का आरक्षण तय होगा। इसे लेकर निवर्तमान पार्षदों समेत तमाम दावेदारों की निगाहें वार्डों के आरक्षण पर टिकी हैं। आरक्षण जारी होने के बाद कई सीटों चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों के अरमानों पर पानी भी फिर सकता है।
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