विकास कार्यों में घोटाले के मामले में की जाएगी रिकवरी
अमर उजाला ब्यूरो
खानपुर।
दल्लावाला गांव में मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए विकास कार्यों में ग्रामीणों की शिकायत पर एडीएम के निरीक्षण में अनियमितता मिलने के बाद एडीएम ने मुख्य विकास अधिकारी को मामले में संलिप्त रहे जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारियों से रिकवरी करने की सिफारिश भेज दी है। मनरेगा घोटाले के मामले में ग्राम पंचायत सचिव सहित ब्लॉक के कई अन्य कर्मचारियों के साथ साथ बीडीओ पर भी ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों में घोटाला करने का आरोप लगाया था। ऐसे में कई सरकारी कर्मचारियों पर जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
खानपुर क्षेत्र के दल्लावालाग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने कुछ माह पहले जिलाधिकारी से ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत कराए गए विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों सहित ब्लॉक के कई कर्मचारी सहित पूर्व बीडीओ पर मामले में घोटाला करने का आरोप लगाया था ।इस मामले में एक हफ्ते पहले एडीएम ललित नारायण मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर विकास कार्यों का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने मनरेगा योजना से गांव में तटबंध पर कराए गए पैचिंग कार्य का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पता चला कि योजना पर कुल 29 लाख 70 हजार का बजट खर्च किया जाना था। पंचायत द्वारा इसमें से लगभग 18 लाख का बजट खर्च दर्शाया गया था, जबकि मौके पर 10 फीसदी काम ही हुआ है। एडीएम ने इस पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी थी। निरीक्षण के बाद उन्होंने घपले की रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार को भेज दी है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में तत्कालीन पंचायत सचिव इरफान अंसारी से सरकारी धन की वसूली किए जाने की संस्तुति की गई है।
बताते चले कि मनरेगा योजना में सरकार मजदूरों या फिर सामान आपूर्ति करने वाली फर्मों को सीधा भुगतान करती है, लेकिन इनके बिलों पर प्रधान व पंचायत सचिव की ही संस्तुति होती है, जबकि कार्यपूर्ति का प्रमाणपत्र जेई बनाते हैं। लिहाजा इस घपले में पंचायत सचिव के अलावा ग्राम प्रधान व जेई पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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मामला मेरे संज्ञान में है, पर अभी तक एडीएम की रिपोर्ट नहीं आई है। संबंधित लोगों से सरकारी धन की रिकवरी के साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
-- स्वाति भदौरिया,मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार