लंढौरा। खलियान की भूमि पर बनाए गए 144 सरकारी भवनों को ध्वस्त करने का मामला फिर गरमा गया है। एडीएम और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने टीम के साथ शुक्रवार को कस्बे में पहुंचकर सरकारी भवनों का मुआयना किया और हल्का लेखपाल को शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए।
वर्ष 2011 में निर्बल आवास योजना के अंतर्गत प्रशासन की ओर से लंढौरा में खसरा-780 पर करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से सरकारी भवनों का निर्माण किया था। निर्माण अभी अधूरा ही था कि लंढौरा निवासी तहसीन ने इन निर्माणों के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी थी। तहसीन ने याचिका में बताया था कि सरकारी भवनों का निर्माण खलियान और तालाब की भूमि पर किया जा रहा है। वर्ष-2015 में हाईकोर्ट ने खलियान और तालाब की भूमि पर बनाए सरकारी भवनों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर पंचायत की ओर से सरकारी भवनों का निर्माण सही बताते हुए डबल बैंच में अपील की थी। शुक्रवार को उच्च न्यायालय के निर्देश पर अपर जिला मजिस्ट्रेट ललित नारायण मिश्रा और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट निकिता खंडेलवाल ने टीम के साथ लंढौरा में सरकारी भवनों का निरीक्षण किया। इस दौरान शिकायतकर्ताओं ने एडीएम को बताया कि सरकारी भवनों का निर्माण खलिहान और तालाब की भूमि पर किया है। एडीएम ने हल्का लेखपाल को शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए। इस दौरान नायब तहसीलदार सुशील कुमार, नगर पंचायत अध्यक्ष खलील अहमद, ईओ राजेंद्र आदि मौजूद रहे। एडीएम ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि शिकायतकर्ता को अपने पक्ष को पुष्टि करने के लिए दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद रिपोर्ट शासन को दे दी जाएगी।