परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन योग जिज्ञासुओं को स्वास्थ्य और चिकित्सा (हेल्थ व हीलिंग) विषय पर आध्यात्मिक ज्ञान दिया गया। डॉ. जैक बुश अमीश शाह ने साधकों को इसकी जानकारी दी।
मंगलवार को ब्रह्ममुहूर्त में कुंडलिनी साधना से योग महोत्सव की शुरुआत हुई। योग और संगीत के अद्भुत संगम के लिए रिकॉर्डिंग आर्टिस्ट राजा कुमारी ने भारतीय और रैप हिप हॉप संगीत का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत किया। उसके बाद विन्यास फ्लो, हठ योग और क्रिया योग जैसे विभिन्न गतिशील योग कक्षाएं आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने चक्र, मंत्र, ध्यान और संगीत सत्रों में भाग लिया। साथ ही ताल वर्कशॉप और स्वास्थ्य सत्र भी हुए।
योगाचार्य डॉ. इंदु शर्मा, योगाचार्य गुरुशब्द सिंह खालसा समेत अन्य योगाचार्यों ने अपनी-अपनी विधाओं का अभ्यास कराया। प्रमुख सत्रों में योगाचार्य किया मिलर ने गंगा के तट पर एक सत्र का आयोजन किया, जिसमें सांस और ध्यान का अभ्यास कराया। एमसी योगी ने संगीत की विधाओं के माध्यम से श्वासों का अभ्यास कराया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि योग और गंगा दोनों ही हमारे भीतर की ऊर्जा को जागृत करने का माध्यम हैं। गंगा की पवित्र धारा जो प्राचीन काल से हमें शुद्धता और दिव्यता का संदेश देती आई है, वही हमें आत्मा की शुद्धि की ओर अग्रसर करती है। यह शरीर को शांति और ऊर्जा प्रदान करती है। योग का अभ्यास शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानने और उसे सही दिशा में लगाने की प्रेरणा देता है।
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि गंगा की आरती हमारा धन्यवाद और प्रेम का समारोह है। 365 दिन हर शाम श्रद्धालु दुनिया के हर कोने से, हर जाति, धर्म, रंग, लिंग, संस्कृति, देशों से आकर एकत्र होते हैं। यह वह समय है, जब हम सभी एकजुट होकर अपनी अंतरात्मा से जुड़ने का प्रयास करते हैं।
किया मिलर ने कहा, मस्तिष्क, शरीर और आत्मा का एकीकरण पहले से कही अधिक महत्वपूर्ण है। अब जो कुछ भी हो रहा है, उसके खिलाफ खुद को खोने से बचने के लिए हमें योग का अभ्यास करना चाहिए। यह हमें हमारे भीतर के सत्य से जोड़ने ओर अपनी वास्तविकता को साकार करने का मार्ग दिखाता है।