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साहित्यकार अपनी रचनाओं से नई पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ें: राज्यपाल

Sun, 25 Oct 2026 07:56 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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- लेखक गांव में अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का शुभारंभ, 60 देशों के साहित्यकारों ने लिया भाग साहित्य, संस्कृति और भारतीय भाषाओं के संवर्धन का संकल्प
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- थानो स्थित लेखक गांव में आयोजित किया गया कार्यक्रम
जौलीग्रांट। थानो स्थित लेखक गांव में रविवार को अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का शुभारंभ हुआ। राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने महोत्सव का उद्घाटन करते हुए साहित्यकारों से अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता जगाने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति व संस्कारों से जोड़ने का आह्वान किया। महोत्सव में करीब 60 देशों के साहित्यकारों और लेखकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान साहित्य, संस्कृति, भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा हुई। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। सुबह से शाम तक विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।

राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने कहा कि लेखक गांव की स्थापना भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रेरणा से हुई है। उनकी कालजयी कविताएं आज भी समाज को प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सुंदरता के साथ वीरता, साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा के लिए भी जाना जाता है। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपनी रचनाओं से राष्ट्रीय कर्तव्यबोध को मजबूत करें और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ें।
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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब कई देश युद्ध और अशांति से जूझ रहे हैं, ऐसे में हिमालय की गोद में स्थित लेखक गांव शांति, संस्कृति और मानवीय सद्भाव का संदेश दे रहा है। उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी लोकभाषाओं को वैश्विक मंच पर उचित स्थान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस श्रद्धा से लोग भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए उत्तराखंड आते हैं, उसी भाव से उन्हें साहित्य, चिंतन और साधना के लिए लेखक गांव भी आना चाहिए।

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने लेखक गांव को साहित्य, संस्कृति और कला का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि यह युवाओं के लिए सृजन और रचनात्मक संभावनाओं का मंच बन सकता है।

ज्ञान और लेखकों का संरक्षण जरूरी
रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि लेखक गांव ज्ञान और सृजन का ऐसा केंद्र बनेगा, जिसकी ज्योति विश्व को आलोकित करेगी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि राष्ट्र की आत्मा को सुरक्षित रखने के लिए ज्ञान और लेखकों का संरक्षण आवश्यक है।
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पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि लेखक गांव का निर्माण अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों के अनुरूप किया जा रहा है। महोत्सव के तहत आयोजित मीडिया सत्र में प्रमुख संपादकों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भारतीय भाषाओं के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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