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तपस्या व योग की भूमि है योगनगरी : राज्यपाल

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Iपरमार्थ निकेतन में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का राज्यपाल ने किया उद्घाटन
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परमार्थ निकेतन की ओर से अतुल्य भारत, पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और आयुष मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर 36वां अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का विधिवत आगाज हुआ। राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि), आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने संयुक्त रूप से महोत्सव का उद्घाटन किया।

राज्यपाल ने कहा कि परमार्थ निकेतन योग का प्रमुख केंद्र है। यह दिव्य भूमि है। ऋषियों के तप व तपस्या की भूमि है। यह योग की असाधारण भूमि है। आप सभी यहां पर प्राणायाम, ध्यान व योग की विभिन्न विधाओं से गहराई से जुड़कर तनाव और टेंशन को दूर कर सकते हैं।
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कहा, यह क्षण अद्भुत है, यह क्षण दैवीय, शांत और खुशी प्रदान करने वाला है। परमार्थ निकेतन, मां गंगा और भगवान शिव के अद्भुत संयोग की धरती है। साथ ही यह शरीर, मन और आत्मा के मिलन की भी धरती है। इन सात दिनों में यहां पर आपको वे तरंगे मिलेगी जिससे आपके आतंरिक वातावरण में विलक्षण परिवर्तन होगा। इन सात दिनों में आप अपने आप से अपनी आत्मा से जुड़कर स्वयं को गहराई से पहचान सकते हैं। इन सात दिनों में आप अपने आपको एक दूसरे स्तर पर, दैवीय स्तर पर ले जा सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत का प्रत्येक नागरिक एक सैनिक है, एक पंडित हैं और संत है। अगर आपको वसुधैव कुटुम्बकम् और सौहार्द का दर्शन करना है तो वह केवल परमार्थ निकेतन गंगा तट पर हो सकता है। आप सभी का इन सात दिनों का अनुभव आपकी जिंदगी को बदलने वाला होगा। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने राज्यपाल को गणेश की दिव्य प्रतिमा और रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
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