खदरी खड़कमाफ में जंगली जानवरों द्वारा रौंदी गई फसल।
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ग्राम सभा खदरी खड़क माफ में फिलहाल हाथी की आमद थम गई है, लेकिन फसलों पर संकट कायम है। बुधवार की रात नील गाय और जंगली सूअरों ने खेतों में धान की लहलहाती फसल को रौंद दिया। इससे फसल सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। वह वन कर्मियों की तैनाती की मांग कर रहे हैं।
तेज बारिश होने के कारण फसलों की रखवाली कर रहे किसान अपने घरों को लौट गए। सुबह जब खेतों में पहुंचे तो फसल का हाल देखकर उनके होश उड़ गए। स्थानीय निवासी विनोद जुगलान ने बताया कि प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून के निर्देश पर बीते साल खेती वाले क्षेत्र के चारों ओर 7 सौ मीटर लंबी खाई खुदवाई गई थी। इससे यहां पर जंगली जानवरों की आमद में काफी हद तक रोक लग गई थी। उन्होंने बताया कि बरसाती दिनों में खाई में मलबा भर जाने के कारण नील गाय और जंगली सूअरों के झुंड खेतों की ओर आ रहे हैं। स्थानीय कृषक राय सिंह ने बताया कि धान की फसल में बालियां आने लगी हैं, इस वक्त अगर फसल क्षतिग्रस्त हुई तो किसानों को उपज से हाथ धोना पड़ सकता है।
जैव विविधता समिति के सदस्य डॉ कर्ण सिंह राणा का कहना था कि फसलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से खाई खुदान का कार्य जारी है, लेकिन जिन स्थानों पर खोदी गई खाई में मलबा भर गया है, उसे भी साफ किया जाना चाहिए। जहां ऐसा संभव नहीं, वहां एंटी वाइल्ड लाइफ डिस एमिनेटर यंत्र लगाया जाना चाहिए। इस संबंध में ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए यहां पर वन कर्मियों की तैनाती की जाए। इस मौके पर निवर्तमान ग्राम प्रधान सरोप सिंह पुण्डीर, मोहर सिंह, कुंदन सिंह, अजय सिंह, मदनलाल रयाल आदि उपस्थित थे।