उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) के अंतर्गत ऋषिकेश, मुनि की रेती, तपोवन व स्वर्गाश्रम में 1800 करोड़ रुपये से निकायों के विकास कार्यों को लेकर संबंधित क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बैठक आयोजित हुई। अधिकारियों के निर्धारित समय पर न पहुंचने से आक्रोशित व्यापारियों ने बैठक का बहिष्कार किया। व्यापारी करीब ढाई घंटे तक अधिकारियों का इंतजार करने के बाद बैठक से उठ कर चले गए।
सोमवार को नगर निगम सभागार में बैठक प्रस्तावित थी। जिसके लिए प्रशासन की ओर से ढाई बजे का समय निर्धारित किया गया था। बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल सहित देहरादून, टिहरी व पौड़ी के जिलाधिकारियों को शामिल होना था। बैठक में शहर के व्यापारियों सहित अन्य संगठनों को भी बुलाया गया था।
व्यापारी निर्धारित समय पर बैठक में पहुंच गए। लेकिन करीब चार बजे तक कैबिनेट मंत्री व जिलाधिकारियों के न पहुंचने पर व्यापारी आक्रोशित हो गए। प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष कोहली बैठक से उठ गए।
उनके उठते ही सभी व्यापारी अपने सीटों से उठे और बैठक का बहिष्कार कर दिया। शाम चार बजे बाद बिना व्यापारियों की मौजूदगी के हुई बैठक में मंत्री अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की बाह्म सहायतित परियोजना के तहत ऋषिकेश, मुनि की रेती, तपोवन व स्वर्गाश्रम में 1800 करोड़ रुपये की धनराशि से वेडिंग जोन, सीवरेज सिस्टम, पेजयल आपूर्ति, नगरीय यातायात प्रबंधन, बाढ़ प्रबंधन, हरित विकास व सौंदर्यीकरण, पार्किंग आदि कार्य किए जाने हैं।
बताया कि अगले छह साल के भीतर यह कार्य किए जाएंगे। जिसके प्रथम चरण में 900 करोड़ और दूसरे चरण में 900 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएंगी। बैठक में पुरानी सीवरेज लाइन के चौड़ीकरण, ब्रह्मपुरी के समीप राफ्टिंग को साइलेंट जोन घोषित करने, ट्रांसपोर्ट नगर की मांग, मुख्य चौराहों का शंख, धनुष आदि की आकृति में सौंदर्यीकरण, फायर ब्रिगेड की लाइन अलग किए जाने, यात्रा काल में बाईपास से ट्रैफिक शिफ्ट नहीं करने, गोसेवा केंद्र खोले जाने, गल्ला व कृषि व्यापारियों के लिए नवीन मंडी स्थल तलाश करने आदि से संबंधित कई सुझाव प्राप्त हुए।
इस अवसर पर डीएम पौड़ी डॉ. आशीष चौहान, यूयूएसडीए निदेशक चंद्रेश कुमार, यूयूएसडीए अपर निदेशक विनय मिश्रा, रविंद्र राणा आदि मौजूद रहे।
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देहरादून व टिहरी के डीएम भी नहीं आए
बैठक में सिर्फ पौड़ी के डीएम शामिल हुए। टिहरी व देहरादून के डीएम नहीं आए। जबकि बैठक में टिहरी, पौड़ी व देहरादून के जिलाधिकारियों को शामिल होना था। व्यापारियों का कहना है कि अधिकारी बैठकों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। केवल औपचारिकता निभाई जाती है।
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- बैठक के लिए ढाई बजे बुलाया था, लेकिन चार बजे तक अधिकारी नहीं आए। हम लोग इंतजार करते रहे। बाद में व्यापारियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। भविष्य में भी इंतजार कराया गया तो बैठकों का बहिष्कार किया जाएगा। - सुभाष कोहली, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
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- सबके समय की कीमत है। बैठक के लिए सभी व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों को छोड़ कर आए थे। लेकिन अधिकारी निर्धारित समय के दो घंटे बाद तक बैठक में नहीं आए। जिससे व्यापारियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। - ललित मोहन मिश्रा, अध्यक्ष उद्योग नगर व्यापार प्रतिनिधि मंडल