सन 2000 के निरस्त किए मानचित्र पर ही क्रय-विक्रय की जा रही जमीनें
नगर पालिका डोईवाला का हिस्सा बन चुकी भानियावाला ग्राम सभा में 1995 से शुरू हुआ बंदोबस्त 28 सालों में भी पूरा नही हो सका है। सन 2000 में शासन द्वारा निरस्त किए गए बंदोबस्त के मानचित्र के आधार पर ही यहां जमीनों की खरीद-फरोख्त की जा रही है।
भाजपा अनुसूचित मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामकिशन ने कहा कि राजस्व ग्राम भानियावाला में 1938 में बंदोबस्त के बाद 1995 में दोबारा बंदोबस्त शुरू हुआ था। जो सन 2000 में पूरा हो गया था। सन् 2000 के मानचित्र में त्रुटियां होने के कारण ग्राम वासियों की आपत्तियों के कारण इस बंदोबस्त को शासन ने निरस्त कर दिया था। लेकिन वर्तमान में सन् 2000 के निरस्त मानचित्र पर ही राजस्व ग्राम भानियावाला की भूमि को क्रय-विक्रय किया जा रहा है।
भानियावाला के मानचित्र में खसरा नंबर भी अव्यवस्थित हैं। जमीन कहीं और कब्जा कहीं और है। जिसके कारण ग्राम वासियो में लगातार विवाद भी हो रहे हैं। रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और हरिद्वार सांसद निशंक को इस संबध में ज्ञापन दिया गया है। रामशिकन ने कहा कि प्रशासन को कई बार समस्या से अवगत कराया जा चुका है। लेकिन अभी तक समस्या का सामाधान नही निकला है। राजस्व ग्राम भानियावाला के गरीबों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य वर्ग के लोगो को सरकार ने जो पट्टे अवंटित किए थे। उनकों भूमाफिया खुर्द-बुर्दकर रहे हैं। बन्दोबस्त की अधिकांश खतौनी पर्ची भी बट चुकी हैं और 95 त्रुटियां ठीक की जा चुकी हैं। इसलिए शेष त्रुटियों को ठीक कर जल्द ही नया बंदोबस्त लागू किया जाना चाहिए।
क्या होता है बंदोबस्त
जौलीग्रांट। बंदोबस्त प्रक्रिया अंग्रेजी शासनकाल से चली आ रही है। विकास प्रक्रिया, विभिन्न योजनाओं और दूसरे कारणों से जमीनों पर बनने वाली भवन, इमारतों, सड़कों, हाईवे आदि स्वरूप बदलता रहता है। कई कारणों से नदियों, जंगलों और सरकारी भूमि का स्वरूप बदलता है। जिसमें समय-समय पर सरकार द्वारा बंदोबस्त कराकर जमीनों की वर्तमान स्थिति का पता लगाया जाता है। जिससे सरकार को विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिलती है। तेजी से विकसित हो रहे शहरों या इलाकों में बंदोबस्त जल्द कराया जाना चाहिए।
- भानियावाला में बंदोबस्त को लेकर संबंधित कर्मचारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। जिसके बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जाएगा। -अर्पणा ढौंडियाल एसडीएम डोईवाला।