कोरोनाकाल से तीर्थनगरी के पर्यटन कारोबारी मंदी की मार झेल रहे हैं। वे पानी और बिजली के बिलों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। एनजीटी की रोक के चलते गंगा नदी के तटों पर बीच कैंप का संचालन बंद है। वर्ष 2014 से पर्यटन विभाग की ओर से नए राफ्टिंग व्यवसायियों को लाइसेंस नहीं मिल रहा है। वहीं होटल व्यवसायी लंबे समय से नरेंद्रनगर में पर्यटन विभाग का उप कार्यालय खोलने की मांग कर रहे हैं। पर्यटन कारोबारियों की समस्या हर बार चुनावी घोषणा तक सीमित रह जाती है।
कोरोनाकाल से तीर्थनगरी के व्यापारी मंदी की मार झेल रहे हैं। व्यापार ठप होने के कारण व्यापारियों को बिजली, पानी के बिलों का भुगतान करने में परेशानी हो रही है। पर्यटन बंद पड़ा हुआ है। सरकार की ओर से स्थानीय व्यापारियों को कोई मदद नहीं दी गई है। किसी भी दल के प्रत्याशी ने आज तक इसकी सुध नहीं ली है।
-नारायण सिंह रावत, व्यापारी स्वर्गाश्रम
वर्ष 2015 में एनजीटी ने गंगा नदी के तटों पर संचालित बीच कैंपों पर रोक लगा दी थी। वर्ष 2016 में एनजीटी ने तत्कालीन सरकार को इसकी नीति तैयार करने के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक बीच कैंपिंग के लिए कोई नीति नहीं बनी है। इसके चलते बीच कैंप बंद हैं।
-दिनेश भट्ट, अध्यक्ष गंगा नदी राफ्टिंग रोटेशन समिति
वर्ष 2014 के बाद राफ्टिंग व्यवसायियों को पर्यटन विभाग की ओर से नया लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।
-जीतपाल सिंह, राफ्टिंग व्यवसायी
होटल संचालकों को अपने होटल संबंधी कार्यों के लिए जिला टिहरी कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। होटल व्यवसायियों ने कई बार पर्यटन विभाग का उपकार्यालय नरेंद्रनगर में खोलने की मांग की थी, लेकिन आज तक यह केवल समस्या बनकर रह गया है।
-अनुसूया प्रसाद पांडेय, होटल व्यवसायी