दून रोड स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में डेढ़ वर्ष पहले परमार्थ निकेतन आश्रम की पहल पर जैविक शौचालय का शिलान्यास हुआ था। भारतीय हैवी इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीएचईल) और फेडरेशन ऑफ इंडिया चेंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से शौचालय का निर्माण होना था। लेकिन, वित्तीय अभाव के कारण फिक्की संस्था जैविक शौचालय का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया है। जिसका खामियाजा स्कूली बच्चों और शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।
फरवरी 2015 में भारत में अमेरीका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने परमार्थ निकेतन आश्रम के सहयोग से जीजीआईसी में जैविक शौचालय की नींव रखी थी। लगभग तीन लाख की लागत से छह सीटर शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी फिक्की संस्था को सौंपी गई थी। जिसकी वित्तीय जिम्मेदारी बीएचईएल की थी। डेढ वर्ष में केवल संस्था ने खानापूर्ति के लिए शौचालय की दिवारें खड़ी कर दी। उसके आगे का कार्य अधूरा छोड़ संस्था गायब हो गई। शौचालय के आसपास खोदा गया गड्ढा इन दिनों दुर्घटनाओं का कारण बना हुआ है। वहीं, स्कूल में पढ़ रहे करीब 1300 छात्राओं का जैविक शौचालय बनने का सपना टूट गया है।
पर्यावरण को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के लिए परमार्थ निकेतन की ओर से इसका प्रचार-प्रसार किया गया। जैविक शौचालय के निर्माण की जिम्मेदारी फिक्की संस्था को सौंपी गई थी। लेकिन निर्माण कार्य क्यों बंद हुआ, इसके लिए संस्था के प्रबंधक से वार्ता कर समस्या का समाधान किया जाएगा। -स्वामी चिदानंद सरस्वती, परमाध्यक्ष परमार्थ निकेतन आश्रम।
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फिक्की केवल निर्माणदायी संस्था है। शौचालय निर्माण के लिए संस्था को बजट स्वीकृत बीएचईएल से होना है। बजट के कमी के कारण शौचालय निर्माण कार्य रुका हुआ है। इस बारे में बीएचईएल अधिकारियों से जल्द बैठक होगी। शीघ्र ही आधा, अधूरा पड़ा जैविक शौचालय का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। -रुबाब सुध, प्रबंधक, फिक्की।