यमकेश्वर विकास खंड के जंगलों में आग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले पांच दिनों से सुलग रहे मणिकूट पर्वत के जंगलों की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि नीलकंठ क्षेत्र में मलेल गांव से सटा जंगल धधक उठा। आग इतनी भयानक थी कि लपटें आबादी तक पहुंचने लगीं।
पुलिस को आग की भीषण लपटों पर काबू पाने के लिए तीन घंटे से अधिक का समय लग गया। दावानल से वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, जानमाल की र्कोई क्षति नहीं हुई।
शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे मलेल गांव से सटे जंगल से धुआं निकलने लगा। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते आग की लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें गांव तक पहुंचने लगीं, जिससे भय के मारे अफरातफरी का माहौल हो गया।
सूचना पर लक्ष्मणझूला थाना पुलिस आग बुझाने के उपकरण के साथ मौके पर पहुंची और राहत बचाव कार्य में जुट गई। विकराल हो चुकी आग को बुझाने में पुलिस को तीन घंटे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। थाना प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह ने बताया कि जंगल में आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। समय रहते आग पर काबू पाने से हादसा टल गया।
दमकल कर्मियों को छकाती रही आग
शुक्रवार को विभिन्न स्थानों पर झाड़ी और जंगलों में एक के बाद एक आग की सूचना से दमकल कर्मी दौड़ धूप करते रहे। बताया जा रहा है कि सुबह चीला बैराज मार्ग पर कुनाऊं गांव के पास जंगल में आग लग गई। दमकल कर्मी वहां से आग बुझाने के बाद फायर स्टेशन पहुंचे, तभी सूचना मिली कि खैरी खुर्द में निर्मल आई इंस्टीट्यूट के पास झाड़ियां धधक रही हैं।
तत्काल मौके पर पहुंचकर फायर कर्मियों ने राहत बचाव किया। इसी बीच छिद्दरवाला में मार्ग किनारे सूखी झाड़ी में आग लग गई। हालत यह रही कि छिटपुट आगजनी की सूचना पर दमकल सुबह से शाम तक भागते रहे।