मशहूर शायर बशीर बद्र लिखते हैं- यूं ही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में रहा करो, वो ग़जल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो, कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से, ये नए मिजाज का शहर है, जरा फासलों से मिला करो। इन लाइनों को बशीर बद्र साहब जाने कब लिख गए, लेकिन यही आज की हकीकत है। इन नजरों ने शहर की तस्वीर उतारी है, जहां तलक नजर दौड़ाई जिंदगी भारी है.... कैसे-बता रहे हमारे वरिष्ठ संवाददाता विनोद मुसान तीर्थनगरी लाइव में-
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो...
ऋषिकेश। बीते दिवस यानि रविवार को आप घरों में कैद थे। चिकित्सा कर्मियों, पुलिस के अलावा आवश्यक सेवा से जुड़े कुछ लोगों के साथ हम अखबारनवीस भी सड़कों पर थे। शटर वाले टीवी से एलईडी और रिंगिग वाले टेलीफोन से मोबाइल देखने वाली पीढ़ी के लिए महामारी से बचने का ये कर्फ्यू भी नया था। ऐसा पहली बार हुआ, जब पूरा देश घर में सोकर भी जाग रहा था। आने वाले दिन कैसे होंगे, इसका तो पता नहीं, लेकिन बीते दिन के कुछ दृश्य हम
सुबह छह बजे
सुबह छह बजे आंख खुली तो सड़कों पर कुछ गाड़ियों के आने-जाने की आवाज सुनाई दी। इधर, टहलते हुए अखबार के हॉकरों के पास पहुंचा तो वे जल्दी में दिखाई दिए। सब सात बजे से पहले घरों में अखबार पहुंचा देना चाहते हैं। इक्का-दुक्का चाय की दुकानें भी खुल चुकी हैं। लोग चाय पीते हुए कोरोना के साथ मोदी जी के 14 घंटे के जनता कर्फ्यू पर चर्चा करते हुए दिखाई दिए। बोले, मोदी जी की ये तरकीब सफल हुई तो आने वाली पीढ़ियां उन्हें हमेशा याद रखेंगी। टहलते हुए त्रिवेंणी घाट पर पहुंचे तो यहां नित गंगा पूजन करने वाले कई भक्त जल चढ़ाते नजर आए। आसपास के मंदिरों में भी धूप-दीए के साथ लोग भगवान की पूजा अर्चना कर रह हैं। सात बजते-बजते फिर से घाट सुनसान हो गया।
आठ बजे
आठ बजे त्रिवेणी घाट पर अब यहां संन्नाटा है। घाट पर स्थित इंद्रवती विश्राम गृह भिक्षुओं से भरा है। इनका कोई घर नहीं, कहां जाएं। आज रोटी भी नसीब होगी या नहीं, सबको इसी की चिंता है। लेकिन झुंड में बैठे इन लोगों को देखकर चिंता जरूर हुई। भगवान न करे इनमें अगर एक भी व्यक्ति संक्रमित हो गया तो फिर क्या होगा? ये सुबह-सुबह उठकर रोज घर-घर जाकर भीक्षा मांगते हैं। एक इलाके से दूसरे इलाके में टहलते हैं। अभी देर नहीं हुई सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा।
10 बजे
अब शहर के थाना क्षेत्रों में जायजा लेने की बारी थी। सुनसान सड़कों की दोनों तरफ दुकानों के बंद शटर जैसे आपस में बातें कर रहे थे। आह..! कितने दिनों बाद आज खुलने-बंद होने की खड़खड़ नहीं सुनाई दी। इधर, शहर की अलग-अलग चौकियों के प्रभारी शहर के प्रमुख व्यापारियों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। आने वाले दिनों यदि आपातकाल की स्थिति आती है, तो पुलिस खुद लोगों के घरों तक राशन पहुंचाएगी। इस बात ने काफी सुकून दिया डंडे वाली पुलिस पब्लिक के बारे में इतनी गहराई से सोचती है। किसके आदेश पर यह सब कार्रवाई कर रहे है, पूछने पर चौकी प्रभारी बताते हैं, कोतवाल साहब (रितेश शाह) का आदेश है। अपनी तैयारी पूरी रखो।
12 बजे
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से होते हुए मैं कोतवाली जा पहुंचा। इधर, कोतवाली में भी शांति है। न वादी हैं न फरीयादी। पुलिस भी अपने-अपने काम में लगी है। प्रवेश द्वार पर ही हाथ धोने के लिए साबुन और पानी की व्यवस्था की गई है। एक बोर्ड पर साफ लिखा है, कोतवाली में घूसने से पहले हाथ धोकर ही प्रवेश करें। कोतवाल रितेश शाह के बारे में पूछने पर एक सिपाही इशारा करता है। वे एक पेड़ के नीचे खड़े हैं। तभी मैंने पास जाकर पूछा क्या देख रहे हो। बोले, देख नहीं सुन रहा हूं। तुम भी सुनों। वाकही.. इस शहर में चिड़ियों की इतनी तेज चहचहाट कोतवाल ही नहीं मैंने भी पहली बार सुनी। रोज गाड़ियों की आवाज में चिड़ियों की आवाज दब जाती है। लेकिन आज इनका झुंड पूरे सबबा में कौतूहल कर रहा है। कोरोना का कहर ही सही, लेकिन आज उसने हमें पक्षियों के संसार में झांकने का भी मौका दे दिया। मैंने पूछा भाई साहब, शहर में शांति है। बोले, जब इंसानों की आवाज दब जाए और पशु-पक्षियों की आवाज सुनाई दे, तब समझ जाओ, वाकही शांति है। खैर, वैसे कहीं से भी किसी अप्रिय घटना का कोई समाचार नहीं है। चलो आओ चाय पीते हैं....
2 बजे
रात बारिश के बाद हवा में ठंडक है, लेकिन दोपहर होते-होते धूप तेज हो चली है। सड़कों पर दिखाई देने वाले इक्का-दुक्का लोग भी अब नजर नहीं आ रहे हैं। पुलिस कहीं नजर नहीं आ रही है। या यूं कहें कि जरूरत नहीं नहीं है। लोग स्वत:स्फूर्त जनता कर्फ्यू का पालन कर रहे हैं। जनता का कर्फ्यू जनता के लिए...। ऐसा शायद पहली बार हो रहा है, जब एग्जाम हॉल में कोई मास्टर नहीं है और लोग नकल भी नहीं कर रहे। रात की बसों में कुछ लोग दिल्ली, चडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और दूसरी जगहों से ऋषिकेश पहुंचे थे। सुबह चंद्रभागा पुल, बस स्टैंड नटराज चौक, टैक्सी स्टैंड आदि स्थानों से ऊपर पहाड़ों में चढ़ने के लिए वाहन का इंतजार करते हुए नजर आए थे। सोचा उनकी भी खबर ली जाए। कभी अब भी तो खड़े नहीं है इधर-उधर। पूरा चक्कर मारा तो कहीं लोग नहीं दिखाई दिए। इतने में एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला का फोन आ गया, उन्होंने बताया कि कुछ लोगों के सवारी वाहनों को लेकर ढूंढखोज की खबर आई थी। इस पर कुछ वाहनों को आइसोलेट कर उनमें सवारियां बैठाकर गतंव्य के लिए रवाना किया गया।
4 बजे शाम
आज शहर में नेता-अभिनेता, कोई नहीं मिल रहा। दुआ-सलाम भी बंद है। किसी के घर जाने की सोच भी नहीं सकते। जाना भी नहीं चाहिए। लोग शंका भरी नजरों से देखते हैं। पता नहीं कहां से आ रहे हैं। सुबह से कुछ नहीं खाया। सोचा किसी मित्र के यहां चला जाऊं, लेकिन फिर मन मसोस कर रह गया। खैर आज वर्त ही सही। इधर, एक राह से गुजरते हुए बुजुर्ग दंपती मिल गया। पूछने पर बुजुर्ग महिला ने बताया, सांस की दिक्कत है। अस्पताल जा रहे हैं। बुखार इत्यादी तो नहीं है। बोले नहीं। वर्षों से दिक्कत है। अस्पताल से दवाई लेने जा रहे हैं। मैंने कहा, ऐसे मत जाओ, रूको गाड़ी बुलाता हूं। पुलिस को फोन लगाया और गाड़ी मंगाकर उन्हें अस्पताल रवाना किया। उनकी दुवाओं के साथ आगे बढ़ा तो सबकुछ व्यस्थित नजर आया। दून चौराहा शहर का प्रमुख केंद्र है।
6 बजे शाम
वातावरण में थोड़ी सी ठंडक आ चुकी है। लेकिन कोरोना की गर्मी ने अब भी लोगों को घरों में ही कैद कर रखा है। या यूं कहें, वे इस राष्ट्रीय मिशन में डटकर अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। राजकीय चिकित्सालय में भी सुबह से बहुत कम लोग पहुंचे हैं। यहां का स्टाफ मुस्तैद, लेकिन सुस्ता रहा है। चेहरों में मास्क है, चहलकदमी बेहद कम। तहसील में, सीओ दफ्तर, रजिस्ट्रार दफ्तर, खाद्य आपूर्ति कार्यालय, आबकारी कार्यालय, राजस्व, कोर्ट इत्यादी सब सूने पड़े हैं। हरिद्वार की तरफ जाने वाली सड़क भी सुनसान पड़ी है। जगह-जगह वाहन भी खड़े सुस्ता रहे हैं। आवारा पशु तक आज नहीं दिखाई दे रहे हैं। इधर, नगर निगम भी कर्फ्यू के साए में है। यहां भी कोई नहीं दिखाई दे रहा। कई बार यह दृश्य डरावना सा लगता है।
रात 8 बजे
स्ट्रीट लाइटें जल चुकी हैं। लोगों के घरों में रोशनी है। खिड़कियों से ताकझांक हो रही है, लेकिन लोग जनता कर्फ्यू का अब भी शिद्दत से पालन कर रहे हैं। सड़कें अब भी सुनसान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से रात 9 बजे तक का आह्वान किया है। लेकिन, जितने भी लोगों से इस बीच हमने बातचीत की, सबका यही कहना था हम अब कल ही बाहर निकलेंगे। लेकिन कुछ बेसबरे हैं, जो रात नौ बजते ही हुड़दग के मूड़ में दिख्रते हैं। किसी को दारू लेने ठेके जाना है तो किसी को रिश्तेदारी निभानी है। जो भी हो, जिस तरह लोगों ने पूरे दिन जनता के लिए जनता के कर्फ्यू को सफल बनाया, उम्मीद है जब तक इस खतरनाक वायरस का खात्मा नहीं हो जाता, लोग खुद संयम बरतेंगे। ये वायरस सिर्फ आज के लिए आपके शहर में आने वाला नहीं था। ये कभी भी आज सकता है।
सुनसान पड़ा लक्ष्मणझूला मार्ग।- फोटो : RISHIKESH
सुनसान पड़ा बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग।- फोटो : RISHIKESH
भद्रकाली में पर्वतीय क्षेत्रों को जाने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्य कर्मी।- फोटो : RISHIKESH
चद्रभागा नदी में जनता कर्फ्यू के दौरान क्रिकेट का आनंद लेते बच्चे।- फोटो : RISHIKESH
सुनसान रहा रेलवे रोड।- फोटो : RISHIKESH
सुनसान पड़ा भद्रकाली मार्ग।- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश में जनता कर्फ्यू के दौरान सुनसान पड़ा पैट्रोल पंप- फोटो : RISHIKESH
सुनसान पड़ा चारधाम यात्रा बस अड्डा।- फोटो : RISHIKESH
हरिद्वार मार्ग पर गुजरता विदेशी नागरिकों का जोड़ा।- फोटो : RISHIKESH