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Rishikesh News: खेलने-कूदने की उम्र में भीख मांग रहे बच्चे, प्रशासन उदासीन

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योगनगरी में खेलने-कूदने और स्कूल जाने की उम्र में बच्चे सड़कों, बाजारों व गंगा घाटों पर भीख मांगते नजर आ रहे हैं। पुलिस-प्रशासन और संबंधित विभाग भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने में विफल नजर आ रहा है। यहां भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों की भरमार है।
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डीएम सविन बंसल के निर्देश का ऋषिकेश में कोई असर नहीं दिखा है। गंगा घाटों से लेकर पर्यटन स्थलों तक भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों की भरमार है। त्रिवेणीघाट, आईएसबीटी और नटराज चौक के पास भीड़ वाले इलाकों में इनकी सबसे अधिक संख्या देखने को मिलती है।



इनमें कई के साथ उनके माता-पिता और रिश्तेदार भी शामिल होते हैं। बच्चे सिर्फ रुपये मांगते हैं। यदि कोई उनको कोई खाना खिलाने की बात करे तो वह इंकार कर देते हैं और बदले में रुपये मांगते हैं। घाटों और अन्य जगहों पर भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चे पर्यटकों को भी परेशान करते हैं। पर्यटकों को घेर लेते हैं। जिसके चलते पर्यटक पांच-दस रुपये देकर अपना पल्ला छुड़ाते हैं।
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इसके अलावा त्रिवेणीघाट सहित अन्य गंगा घाटों पर बच्चे फूल आदि बेचते भी दिख रहे हैं। ये बच्चे सामान खरीदने के लिए पर्यटकों को विवश करते हैं। लेकिन डीएम के निर्देश के बावजूद भी प्रशासन में बैठे अधिकारी इन मासूमों को भिक्षावृत्ति के मकड़जाल से निकालने के लिए कार्रवाई को तैयार नहीं हैं। वहीं सरकार के ऑपरेशन स्माइल और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं को भी पलीता लगा रहे हैं।





Iमहिलाएं करती हैं दुधमुंहें बच्चों का इस्तेमाल
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कई महिलाएं दूधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर चौराहों और घाटों पर घूमती हैं। कुछ बच्चों के माथे या हाथ-पैर पर पट्टी बांधकर उनको बीमार या चोटिल दिखाती है। जिससे लोगों में दयाभाव उत्पन्न हो और उन्हें बच्चे के इलाज के बहाने अधिक से अधिक भीख मिल सके। कई जगहों पर तो छोटी बच्चियां दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर भीख मांग रही हैं।


जिले में भिक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। यदि ऋषिकेश में भी बच्चे भिक्षावृत्ति कर रहे हैं तो कार्यक्रम अधिकारी से बात कर शहर में अभियान चलाया जाएगा। - स्मिता परमार, एसडीएम ऋषिकेश
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