शासन की मंजूरी के बिना नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक में तैनात अस्थायी अवर अभियंता (जेई) की सेवा समाप्त कर दी गई है। अधिशासी अधिकारी की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। 20 जून को निकाय को इसके लिए शासन से आदेश प्राप्त हुआ था।
उत्तराखंड शहरी विकास निदेशालय के अपर निदेशक ललित नारायण मिश्रा की ओर से नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक में शासन की मंजूरी के बिना कार्य कर रहे जेई की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए गए थे।
गौरतलब है कि नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक में जनवरी 2017 में पद न होते हुए भी निकाय में अस्थायी अवर अभियंता की तैनाती कर दी गई थी। शासन स्तर से कार्रवाई होने के बाद उत्तराखंड शहरी विकास निदेशालय के अपर निदेशक ने इस ओर कार्रवाई करते हुए निकाय में तैनात अस्थायी जेई की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए थे।
निकाय के अधिशासी अधिकारी अंकित राणा ने बताया कि उन्हें शासन स्तर से आदेश प्राप्त हुए थे। निकाय की ओर से 9 जुलाई को अस्थायी अवर अभियंता की सेवा समाप्त कर दी गई है। इसके लिए जेई को आदेश जारी कर दिया गया है।
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वित्तीय अनियमितता की चल रही है जांच
भले ही अस्थायी रूप से तैनात जेई को निकाय की ओर से पदमुक्त कर दिया है लेकिन उनपर अभी भी वित्तीय अनियमितता की जांच चल रही है। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक विवेक कुमार उपाध्याय को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। स्वर्गाश्रम जौंक निवासी और पूर्व सभासद नवीन सिंह राणा ने शासन स्तर से इस पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी, जिसमें यह खुलासा हुआ था कि निकाय में तैनात जेई पर निकाय के विभिन्न कार्यों में सरकारी धन का दुरुपयोग करने की जांच चल रही है। नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौक कार्यालय भवन में इंटरलॉकिंग टाइल्स और सौंदर्यीकरण, वार्ड नंबर चार में गीता भवन गेट से श्री रास विहारी अग्रवाल के घर तक इंटरलॉकिंग टाइल्स से मार्ग निर्माण कार्य, वार्ड नंबर दो में सरोजनी देवी के घर से मणिकूट होटल तक इंटरलॉकिंग टाइल्स से मार्ग का निर्माण कार्य, वार्ड नंबर एक में अमन प्रजापति की दुकान से जगदीश प्रजापति, राकेश प्रजापति और राम प्रजापति के घर तक इंटरलॉकिंग टाइल्स निर्माण कार्य और वार्ड नंबर तीन में चौहान होटल के निकट बाल विद्या निकेतन की ओर सीसी सड़क, निकासी नाला कार्य में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप है।