यमकेश्वर। विकासखंड यमकेश्वर के दयाकाटल गांव के समीप रवासन (सतेड़ी) नदी पर प्रस्तावित झील एवं बैराज निर्माण परियोजना जल्द धरातल पर आकार लेती नजर आएगी। इसके लिए प्रशासन ने संयुक्त सर्वे शुरू कर दिया है।
एसडीएम यमकेश्वर चतर सिंह चौहान के निर्देश पर वन विभाग, सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को दयाकाटल स्थित पीपलडांगा पुल से लगभग 500 मीटर ऊपर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान यह चिह्नित किया जा रहा है कि झील निर्माण से प्रभावित क्षेत्र में कितनी निजी, वन एवं सरकारी भूमि आएगी। इसी आधार पर आगे भूमि अधिग्रहण और परियोजना की अन्य प्रक्रियाएं तय की जाएंगी। यह परियोजना क्षेत्र के लिए कई मायनों में परिवर्तनकारी साबित हो सकती है।
झील बनने से वर्षा जल का बेहतर संरक्षण होगा जिससे आसपास के गांवों को सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता में मदद मिलेगी। साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार की भी उम्मीद है। ग्रामीण प्रदीप बडोला, विजयपाल सिंह नेगी, राकेश नेगी, राजदीप सिंह का कहना है कि झील बनने के बाद यमकेश्वर क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
बोटिंग, पिकनिक और प्रकृति दर्शन जैसी गतिविधियों से होमस्टे, गाइड, दुकानदारी और अन्य रोजगार के अवसर पैदा होंगे। झील निर्माण के दौरान और बाद में भी स्थानीय लोगों को काम मिलेगा। झील बनने से रवासन नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे गर्मियों में भी क्षेत्र में जल स्रोत रिचार्ज रहेंगे।