तीर्थनगरी में रात करीब 9 बजकर 10 मिनट पर चांद निकला। पति की दीर्घायु की कामना को करवाचौथ का निर्जल व्रत धारण करने वाली सुहागिनों ने पूजा-अर्चना की। चांद का दीदार किया और पानी पीकर व्रत खोला।
करवाचौथ पर्व को लेकर सुबह से बाजारों में रौनक नजर आई। ज्वैलरी और श्रृंगार की दुकानों में महिलाओं की खासी भीड़ रही। दोपहर में जगह-जगह सुहागिनों ने सामूहिक पूजा की और करवाचौथ से जुड़ी कथा का श्रवण किया। रात को चांद का दीदार कर सुहागिनों ने छलनी से चांद को देखा। जल तर्पण किया और पति के हाथों पानी पीकर निर्जल व्रत को तोड़ा। त्रिवेणीघाट में देर रात तक रौनक रही। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में करवाचौथ का पर्व श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुहागिनों ने उपवास रखकर पति की दीर्घायु की कामना की। घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए गए थे। देर रात तक नगर के बाजारों में रौनक देखने को मिली।