जहां एक ओर देश में धार्मिक उन्माद फैलाने वालों की कमी नहीं है। वहीं, मुस्लिम शफीक अहमद बीते तीन दशकों से हिंदू पर्व दशहरा को लेकर पुतला तैयार कर धार्मिक सौहार्द फैला रहे हैं। इस बार भी उन्होंने लक्ष्मणझूला, आईडीपीएल और त्रिवेणीघाट पर मनाए जाने वाले दशहरा पर्व को लेकर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ का पुतला तैयार किया है।
मुजफ्फरनगर निवासी शफीक बताते हैं कि पुतला बनाने की परंपरा उन्हें विरासत में मिली है। 1964 में पहली बार उनके पिता रियाजुद्दीन अहमद ने आईडीपीएल में 70 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया था। उसके बाद से उनकी यह परंपरा आगे बढ़ती चली गई। 1986 से उन्होंने भी पिता के इस कारोबार में हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि तीन दशकों से वो ही तीर्थनगरी में पुतलों की तैयारी करते हैं। बताया कि उन्हें पुतलों के लिए डेढ़ महीने का वक्त लगता है। करीब 15 कारीगरों द्वारा तैयार किए गए पुतलों के लिए उन्होंने रक्षाबंधन के बाद से इन पर काम शुरू कर दिया था।
एक पुतला बनाने में 35 से 40 हजार रुपये तक का खर्चा आता है। कहते हैं कि उन्हें इसमें बड़ा आनंद आता है। वहीं, समाज में धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के प्रति उनके मन में गुस्सा भी है। कहते हैं कि कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं और खामियाजा समाज को भुगतना पड़ता है।
रावण का 60 फीट लंबा पुतला बनाया
उन्होंने बताया कि त्रिवेणीघाट पर दशहरा पर्व के लिए तीन पुतले तैयार किए हैं, जिसमें कुंभकरण और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई 50 फीट और रावण के पुतले की ऊंचाई 60 फीट है। आईडीपीएल में बनाए रावण का पुतला भी 60 फीट का ही है। वहीं, लक्ष्मणझूला स्थित संतसेवा घाट पर आयोजित दशहरा पर्व के लिए तीन पुतले तैयार किए हैं। जिसमें कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले की ऊंचाई 15 फीट और रावण के पुतले की ऊंचाई 40 फीट है।
तीनों पुतले रहेंगे दर्शकों के आकर्षण का केंद्र
ऋषिकेश। सफीक ने बताया कि दशहरा पर्व पर उन्होंने जमकर अतिशबाजी की तैयारी की है। त्रिवेणीघाट पर खड़े किए रावण और कुंभकरण के पुतले के मुंह से आग और मेघनाथ के मुंह से चक्रमायावी दर्शकों का आकर्षण का केंद्र रहेगा।