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उम्र 70 पार, जुनून अब भी बरकरार

Sun, 09 Oct 2016 01:48 AM IST
naval kishor yadav
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राम के प्रति आस्था - फोटो : file photo
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इसे कला के प्रति समर्पण कहें या भगवान राम के प्रति आस्था। बात कुछ भी हो। आठ साल का बच्चा जब रामलीला के मंचन से जुड़ा तो उसी का होकर रह गया। ऐसा भी नहीं है कि उसने अपने जीवन में कुछ हासिल नहीं किया। अपनी मेहनत के बल पर वह डॉक्टर बना। लेकिन, भगवान राम के प्रति प्रेम, उन्हें इससे दूर नहीं कर पाया। शायद यही वजह है कि किरदार निभाने का जो जुनून उनमें आठ वर्ष की उम्र में था। वह आज 70 बसंत देखने के बाद भी बरकरार है। जी हां, हम बात कर रहे हैं नगर के चिकित्सक डॉ. राजेंद्र प्रसाद गोस्वामी की। 
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पूछने पर बताते हैं कि आठ साल का था। हरियाणा में पिता के साथ रामलीला देखने गया। वहां मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने पिता से किरदार निभाने की जिद की। जिस पर मुझे हनुमान का रोल मिला था। इसके बाद लगातार अलग-अलग किरदार निभाता रहा। वहीं, डोईवाला आने के बाद बीते 10 सालों से भगवान राम का रोल अदा कर रहा हूं। इस बार भी दशहरा मेला कमेटी डोईवाला की ओर से होने वाले रावण दहन कार्यक्रम में श्री राम का चरित्र प्रस्तुत करेंगे।  

बकौल, डॉ. राजेंद्र श्रीराम के व्यक्तित्व ने उन्हें बेहद प्रभावित किया है। इस किरदार को निभाने से पहले श्रीरामचरित मानस और रामायण ग्रंथ का सघन अध्ययन किया। मुझे इसमें आनंद आता है। मैं लगातार इसमें और बेहतर करने की कोशिश करता रहता हूं। कहते हैं कि दशहरा का मैं बेसब्री से इंतजार करता हूं। जैसे ही यह पर्व करीब आता है, अपने किरदार को लेकर अभ्यास शुरू कर देता हूं। जब तक शरीर में दम है, यह किरदार निभाता रहूंगा। 
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