तीर्थक्षेत्र लक्ष्मणझूला और स्वर्गाश्रम में अर्द्धकुंभ मेले के दौरान गंगा में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुुओं की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। समूचे तीर्थक्षेत्र में मेला प्रशासन ने महज छह जल पुलिस कर्मियों और गोताखोरों को तैनात किया है। इसके अलावा कई खतरनाक तटों पर यात्रियों को रोकने को एक भी जवान तैनात नहीं है।
करीब चार किमी लंबे तटों के दायरे में इतनी कम संख्या में जल पुलिस की तैनाती महज औपचारिकता ही प्रतीत होती है। वह भी ऐसे में जब श्रद्धालु संवेदनशील और अति संवेदनशील गंगा तटों पर जोखिम भरी डुबकी लगा रहे हैं। साथ ही नदी के बैकग्राउंड में पत्थरों पर चढ़कर सेल्फी लेने की होड़ भी लगी हुई है।
अर्द्धकुंभ मेले के दौरान लक्ष्मणझूला और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में तीर्थ दर्शन और गंगा स्नान के लिए श्रद्धालु उमड़ने लगे हैं। इनमें से कई लोग नदी तटों की गहराई से अनजान होते हैं। ऐसे में कई बार नदी के कम गहरे तटों, घाटों को छोड़ श्रद्धालु स्नान के लिए गोवा बीच, बांबे घाट, संत सेवा घाट, राधेश्याम घाट, भागीरथी धाम घाट, गंगा लाइन नदी तट जैसे अति संवेदनशील नदी तटों और घाटों का रुख कर लेते हैं।
जहां अक्सर डूबने की घटनाएं हो जाती हैं। हैरत की बात यह है कि तीर्थक्षेत्र के करीब चार से पांच किमी. के तटीय दायरे में मेला और पौड़ी पुलिस प्रशासन ने महज दो गोताखोर और चार जल पुलिस के जवानों को तैनात किया है। इनके लिए इतने लंबे फासले की निगरानी करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। ऐसे में अर्र्द्धकुंभ स्नान पर्वों पर डुबकी लगाते हुए श्रद्धालुओं के डूबने की आशंका बनी हुई है। लेकिन जिम्मेदार लोगों को श्रद्धालुओं की जान की परवाह नहीं है।
गहरे गंगा घाटों और तटों पर जल पुलिस की तैनाती की गई है। यदि और सुरक्षा की जरूरत महसूस की जाएगी, तो जल पुलिस के जवानों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।-डीएस तोमर, सीओ अर्द्र्धकुंभ मेला मेला, पुलिस क्षेत्राधिकारी पौड़ी