पूर्णानंद डिग्री कॉलेज आफ टेक्निकल एजूकेशन में छात्रवृत्ति घोटाले का मामला सामने आया है। यहां कॉलेज प्रबंधन 14 लाख 88 हजार पांच सौ रुपये का गबन कर गया। छात्रवृत्ति के 47 छात्रों को 33-33 हजार रुपये देने के बदले कालेज प्रबंधन ने 2500-2500 रुपये पकड़ाए और बाकी धनराशि ठिकाने लगा दी। एसआईटी की जांच के बाद पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश पर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ गबन, फर्जीवाड़ा सहित चार गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई हाईकोर्ट में डाली गई जनहित याचिका पर हुई है।
वर्ष 2012 में कैलाश गेट स्थित पूर्णानंद डिग्री कॉलेज का संचालन हुआ। कॉलेज की ओर से कुल 53 अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति देने का आवेदन किया गया। इस पर समाज कल्याण विभाग की ओर से वर्ष 2014-15 में छात्रवृत्ति दी गई। विभाग ने कुल 47 छात्रों को 33-33 हजार रुपये छात्रवृत्ति के लिए दिए, जबकि कॉलेज की ओर से कुल 25 छात्रों को ही छात्रवृत्ति वितरित करना पाया गया। एक जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जांच की तो कॉलेज के दस्तावेजों में 2014-15 में ही बीएससी कक्षा में 25 छात्रों का दाखिला लेकर छात्रवृत्ति ली गई और बिना पेपर दिए चला जाना दर्शाया गया। कॉलेज के दस्तावेजों में इन बच्चों की कोई जानकारी भी नहीं है।
पुलिस ने जिस बैंक अकाउंट में बच्चों का खाता कॉलेज की ओर से दर्शाया गया, उसकी जांच की तो हैरतअंगेज बात सामने आई। बैंक की ओर से पुलिस को बताया गया कि 25 छात्रों के बैंक खाते में 33-33 हजार रुपये बतौर छात्रवृत्ति धनराशि आई। इस पर कॉलेज के स्वामी ने बैंक को छात्रों की ओर से एक पत्र दिया। इसमें 30 हजार रुपये आरटीजीएस के जरिये कॉलेज के खाते में रुपये पहुंचाए गए और 2500 रुपये स्वयं छात्रों ने निकाले।
थानाध्यक्ष मुनिकीरेती राम किशोर सकलानी ने बताया कि विभाग की ओर से कुल 15 लाख 51 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। इस प्रकार 14 लाख 88 हजार पांच सौ रुपये का गबन कॉलेज प्रबंधन की ओर से किया गया है। उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रबंधन पर जिला समाज कल्याण विभाग के रुपये गबन, फर्जीवाड़ा सहित 406, 409, 420, 120बी आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा क्षेत्र के सभी विद्यालयों की एसआईटी जांच की जा रही है।
कॉलेज गए ही नहीं और हड़प डाले लाखों
बैंक ने पुलिस को बताया कि वर्तमान में यह सभी खाते बंद हैं। पुलिस ने इसके बाद बैंक में दाखिल छात्रों के केवाईसी फार्म खंगाले। इसमें छात्रों के दर्ज मोबाइल नंबर निकालकर पुलिस ने पूछताछ की। इसमें छात्रों ने अपना पता देवप्रयाग टिहरी गढ़वाल का बताया है। छात्रों ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2014-15 में कुछ लोग उनके गांव में आए और कहा कि ऋषिकेश में पूर्णानंद डिग्री कॉलेज नाम का एक संस्थान है। उक्त कॉलेज में निशुल्क एडमिशन कराया जाएगा और इसके लिए उन्हें रुपये भी दिए जाएंगे। छात्रों ने बताया कि उक्त लोगों ने उनके हस्ताक्षर कागज पर कराए और चले गए। वह कभी कॉलेज ही नहीं गए और न ही उन्होंने कोई परीक्षा दी। उन्होंने ऋषिकेश पहुंचकर 2500 रुपये प्राप्त किए हैं।