शासन से स्वीकृत ढांचे के अनुसार संशोधित वेतन और संविदा कर्मियों के मानदेय भुगतान को लेकर हुई वार्ता में पालिका कर्मियों ने जमकर हंगामा किया। अधिशासी अधिकारी को खरी खोटी सुनाई। हंगामे के बीच मांगें मान लेने और लिखित समझौता होने पर कर्मियों ने हड़ताल वापस ले ली। वहीं, दोपहर बाद नगर पालिका में कार्य सुचारू हो सका।
वेतन को लेकर हुए विवाद को सुलझाने के लिए बृहस्पतिवार को पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, अधिशासी अधिकारी वीपीएस चौहान और संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति अध्यक्ष मंजू चौहान के बीच वार्ता शुरू हुई। शासन से स्वीकृत ढांचे के अनुरूप अकेंद्रीयत कर्मियों को संशोधित वेतन, मेला भत्ता, संविदा कर्मी और आउट सोर्सिंग कर्मियों के मानदेय भुगतान पर चर्चा हुई। सहमति नहीं बनने पर पालिका कर्मी भड़क गए और नारेबाजी करने लगे।
आक्रोशित कर्मियों ने अधिशासी अधिकारी पर उपेक्षित रवैये का आरोप लगाया। चेताया कि मांगें नहीं मानी तो हड़ताल जारी रहेगी। काफी जद्दोजहद के बाद पालिकाध्यक्ष और ईओ ने मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। लिखित समझौता होने पर आक्रोशित कर्मी शांत हुए और हड़ताल वापस ले ली। मौके पर समिति सचिव वेदप्रकाश बिजल्वाण, राजेंद्र गर्ग, सभासद सोनू पांडेय, सुमित पंवार, शिवकुमार गौतम, बृजपाल राणा, हवलदार महेंद्र, नरेश खैरवाल आदि मौजूद थे।
इन बिंदुओ पर समझौता
- अकेंद्रीयत कर्मचारियों को सितंबर के वेतन में ढांचे के अनुसार संशोधित वेतन नियत समय पर किया जाएगा।
- मेला भत्ते का भुगतान पांच दिन के अंदर एसएफसी से होगा। यदि कोई आपत्ति लगती है, उसके लिए कर्मचारी स्वयं उत्तरदायी होंगे।
- संविदा-आउट सोर्सिंग और मेला कर्मियों के मानदेय का भुगतान नकद किया जाएगा।
- नवनियुक्त नियमित सफाई कर्मचारी जिनका अंशदान नियुक्ति की तिथि से नहीं काटा गया है। काटकर नियमानुसार जमा कराया जाएगा।