सीएचसी डोईवाला के अल्ट्रासाउंड रूम का ताला 60 दिन बाद भी नहीं खुला है। रेडियोलोजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासांउड मशीन बंद कमरे में धूल फांक रही है। जिससे लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार के जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के दावे सीएचसी डोईवाला में खोखले दिखाई देते हैं। यहांअल्ट्रासांउड रूम में दो माह से ताला लटका है। दो साल पहले डोईवाला में कार्यरत रेडियोलोजिस्ट का तबादला होने के बाद ऋषिकेश से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सप्ताह में एक दिन अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट मिला था। लेकिन, अटैचमेंट अवधि समाप्त होने के बाद रेडियोलॉजिस्ट डोईवाला अस्पताल में नही आ रहा है। जिस कारण बीते दो माह से अल्ट्रासांउड नहीं हो रहे हैं।
डोईवाला में प्रति सप्ताह अल्ट्रासाउंड कराने वालों लोगों की संख्या करीब 60-70 है। खासकर गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में जहां 330 रुपये में अल्ट्रासाउंड हो जाता है। वहीं, प्राइवेट अस्पताल में लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए 1500-2000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। सपा जिलाध्यक्ष फुरकान अहमद कुरैशी ने कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने जल्द रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं, जनवादी नौजवान सभा जिलाध्यक्ष जाहिद अंजुम, लोक हितकारी परिषद के अध्यक्ष अश्वनी गुप्ता ने भी स्वास्थ्य विभाग से समस्या निदान की मांग की है।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए स्थाई रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए स्वास्थ्य महा निदेशक को पत्र भेजा गया है। स्थाई नियुक्त होने तक विभागीय अधिकारियों से वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भी अनुरोध किया गया है। जल्द व्यवस्था होने की उम्मीद है। - डॉ. सुधीर पांडेय, चिकित्सा अधीक्षक , सीएचसी डोईवाला।