मायाकुंड निवासी सूर्यांश, रुद्राक्ष, अभिनंदन, श्रीधर और समृद्धि पिछले 10 दिनों से रावण का पुतला बनाने में जुटे थे। बच्चों ने घर में उपलब्ध बेकार सामग्री का इस्तेमाल कर यह पुतला तैयार किया था। जब पुतला लेकर नन्हें कलाकार दर्शकों की भीड़ के बीच से दशहरा कमेटी के सदस्यों तक पहुंचे, तो वहां मौजूद लोगों ने उनके हुनर की जमकर सराहना की।
त्रिवेणी घाट के नाव घाट पर दशहरे के दौरान शॉर्ट सर्किट से पुतलों के जल जाने से दशहरा कमेटी के सदस्यों, स्थानीय लोगों और बाहरी राज्यों से मेला देखने पहुंचे दर्शकों को मायूस होना पड़ा। हालांकि, कुछ ही देर बाद मायाकुंड के पांच नन्हें कलाकारों ने अपने हुनर और उत्साह से दशहरे की रौनक दोबारा लौटा दी। बच्चों की ओर से महज 40 रुपये की लागत से तैयार किए गए तीन फीट के रावण के पुतले ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
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दरअसल, मायाकुंड निवासी सूर्यांश, रुद्राक्ष, अभिनंदन, श्रीधर और समृद्धि पिछले 10 दिनों से रावण का पुतला बनाने में जुटे थे। बच्चों ने घर में उपलब्ध बेकार सामग्री का इस्तेमाल कर यह पुतला तैयार किया था। जब पुतला लेकर नन्हें कलाकार दर्शकों की भीड़ के बीच से दशहरा कमेटी के सदस्यों तक पहुंचे, तो वहां मौजूद लोगों ने उनके हुनर की जमकर सराहना की। दर्शकों ने अपने मोबाइल कैमरों में बच्चों की इस अनूठी पहल को कैद किया।
दशहरा कमेटी के सदस्यों ने बच्चों के बनाए रावण के पुतले को आतिशबाजी के खंभे पर स्थापित किया। इसके बाद रामलीला कमेटी के कलाकारों ने नए उत्साह के साथ युद्ध का मंचन शुरू किया। मैदान में एक बार फिर जय श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे। युद्ध के बाद रामलीला के कलाकारों ने बच्चों के बनाए रावण के पुतले का दहन किया, जिससे दशहरे का आयोजन यादगार बन गया।
महज 40 रुपये में तैयार किए गए नन्हें रावण ने न केवल दर्शकों का ध्यान खींचा, बल्कि बच्चों की रचनात्मकता और मेहनत का भी परिचय दिया। उनके उत्साह को देखकर दशहरा कमेटी के सदस्यों और वहां मौजूद लोगों ने पांचों बच्चों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया। शॉर्ट सर्किट से पुतले जलने के कारण छाई मायूसी के बीच बच्चों की इस छोटी-सी पहल ने दशहरे के आयोजन में नई ऊर्जा भर दी।