हरिद्वार रोड पर आयोजित श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करने उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़।
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कथा वाचक आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा मानव के जीवन के उद्देश्य को बताती है। सनातन धर्म के अनुसार जीवन के चार पुरुषार्थ हैं। जिसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के नाम से जाना जाता है। इसमें प्रथम स्थान धर्म का है। धर्म से युक्त ही अर्थ और काम मुक्ति का मार्ग प्रशस्त्र करते हैं।
धर्म रहित अर्थोपार्जन और काम सुख भोग की भावना मानव को पतन के मार्ग पर ले जाती है। हरिद्वार रोड स्थित गंगा व्यू के समीप आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक शास्त्री ने कहा कि अधर्म से कमाया गया धन और संपत्ति व्यक्ति की बुद्धि नष्ट कर देती है।
भौतिकता के युग में सारा संसार अर्थ और भोग के पीछे भाग रहा है। भोगी मानसिकता ने व्यक्ति को अत्यंत स्वार्थी और लोलुप बना दिया है। ऐसा व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी नहीं होता है। ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य शास्त्री ने कहा कि मनरूपी उत्तानुपात की भी दो वृत्तियां हैं।
एक नीति एवं रुचि जिस क्षण मानव रुचि को त्याग कर नीति का आश्रय लेगा तभी वह अपने जीवन के महान लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। भगवान के चरणों का आश्रय लेकर मानव चारों पुरुषार्थों को प्राप्त कर सकता है। आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
इस अवसर पर भगवान दास अग्रवाल, लक्ष्मी देवी, शारदा देवी अग्रवाल, लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, पुष्पेंद्र अग्रवाल, देवव्रत अग्रवाल, शांति प्रसाद बेलवाल, कल्याण सिंह नेेगी आदि उपस्थित रहे।