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तेजस की तकनीक से ऑक्सीजन बनाएगा पीएसए प्लांट

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एम्स में बने ऑक्सीजन गैस प्लांट का निरीक्षण करते जिलाधिकारी डॉ.आर राजेश कुमार, एसएसपी जन्मेजय खं - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में नवनिर्मित पीएसए ऑक्सीजन प्लांट में स्वदेशी फाइटर जेट एलसीए तेजस की ऑक्सीजन तकनीक का प्रयोग किया गया है। डीआरडीओ ने 24 घंटे में एक हजार लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाले प्लांट को महज दो माह में तैयार किया है। इसके बाद एम्स की ऑक्सीजन आपूर्ति क्षमता दोगुनी हो गई है।
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कोरोना की आशंकित तीसरी लहर के मद्देनजर पूरे देश में ऑक्सीजन पावर बैंक को बढ़ाया जा रहा है। देशभर में 548 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट तैयार करने की जिम्मेदारी डीआरडीओ को दी गई है। प्लांट में प्रेशर स्विंग एडसोर्पशन (पीएसए) मालिक्यूलर सीइव (जियोलाइट) तकनीक के प्रयोग से वातावरण में मौजूद तकनीक से ऑक्सीजन बनाई जाती है। इस तकनीक पर आधारित ऑक्सीजन प्लांट्स सबसे पहले लेह और उत्तर-पूर्व के राज्यों में लगाए थे। डीआरडीओ ने अब यह तकनीक टाटा कंपनी, कोयम्बटूर की ट्राईटेंड न्यूमैटिक प्राइवेट लिमिटेड, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैट्रोलियम (आईपीपी) को सौंप दी है। तीनों कंपनियां देशभर में 548 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कर रही हैं। इसमें 380 प्लांट टाटा, 120 प्लांट आईपीपी और 48 प्लांट ट्राईटेंड न्यूमैटिक प्राइवेट लिमिटेड तैयार कर रही है। एम्स ऋषिकेश में स्थापित नए पीएसए प्लांट का निर्माण टाटा कंपनी ने किया है।
190 मरीजों को मिलेगी ऑक्सीजन
पीएसए ऑक्सीजन प्लांट में हर मिनट एक हजार लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होता है। प्लांट से एक समय पर 190 मरीजों को पांच लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा सकती है। वहीं 195 ऑक्सीजन सिलिंडर को रीफिल किया जा सकता है। ऑक्सीजन प्लांट से 64 वेेंटिलेटर को 15 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट की ऑक्सीजन दी जा सकती है।
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एम्स में दोगुनी हुई ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता
एम्स के पहले से लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज प्लांट बना हुआ है। प्लांट की आक्सीजन स्टोरेज क्षमता 30 हजार लीटर है। पीएसए ऑक्सीजन प्लांट से एक दिन में 24 हजार लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। ऐसे में अब एम्स की ऑक्सीजन आपूर्ति क्षमता 54 हजार लीटर हो गई है। यह पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी क्षमता है।
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करीब एक सप्ताह पहले पीएसए ऑक्सीजन प्लांट तैयार हो गया था। प्लांट में 24 घंटे प्रति मिनट एक हजार लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होता है। प्लांट के निर्माण होने उत्तराखंड और अन्य राज्यों से आने मरीजों का इसका लाभ मिल पाएगा। कोविड संक्रमण के दृष्टिगत भी यह एक उल्लेखनीय कदम है।
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-हरीश मोहन थपलियाल, पीआरओ, एम्स ऋषिकेश
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