एक तरफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के मानकों को लागू करना चुनौती बना हुआ है। नियमों की धज्जियां वही उड़ा रहे हैं, जिन पर इनके पालन की जिम्मेदारी है। ताजा मामला वीरभद्र मार्ग स्थित गली नंबर दो के दूसरी तरफ गंगा के तट पर कई टन लोहे का प्लेटफार्म बनाए जाने से जुड़ा है।
बताया जा रहा है कि रातोंरात एक निजी संस्था योगा रिट्रीट को नगर निगम प्रशासन ने गंगा घाट पर अस्थाई प्लेटफार्म बनाने की अनुमति दे दी। खास बात ये है कि एनजीटी को मामले का संज्ञान ही नहीं है। उधर, सिंचाई विभाग ये कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि आस्था पथ की देखभाग निगम को सौंपी गई है, लिहाजा हमारा इस मामले से कोई सरोकार नहीं है। एनजीटी के मानकों के मद्देनजर गंगा तट से 200 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण वर्जित है। वहीं, बृहस्पतिवार को संस्था के संचालक के जन्मदिन समारोह को भव्य बनाने के लिए आस्थापथ स्थित गंगा घाट पर लोहे का प्लेटफार्म बनाने की अनुमति गुपचुप तरीके से दे दी गई। इस समारोह में जिले के सभी बड़े अफसर जुटे थे। संस्था की ओर से रातोंरात कई टन लोहे का इस्तेमाल कर प्लेटफार्म भी बना दिया गया।
मामले ने जब तूल पकड़ा तो संबंधित विभागों के अलग अलग सुर सुनाई पड़ने लगे। हालत ये है तीर्थनगरी में ये लोहे का प्लेटफार्म चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है गंगा किनारे होने वाले निर्माणों पर आम आदमी पर कार्रवाई करने के लिए एनजीटी के मानकों की आड़ में सारे विभाग इकट्ठा हो जाते हैं। रसूखदारों के लिए सारे नियम दरकिनार किए जा रहे हैं।
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आस्था पथ की जिम्मेदारी नगर निगम की
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अनुभव नौटियाल का कहना है कि आस्था पथ का निर्माण सिंचाई विभाग ने ही किया था, लेकिन वर्ष 2010 में इसे तत्कालीन नगर पालिका को हैंडओवर कर दिया गया। ऐसे में आस्था पथ की संपूर्ण जिम्मेदारी नगर निगम की ही है।
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एक दिन के लिए दी गई अनुमति
नगर आयुक्त नरेन्द्र सिंह क्वींरियाल का कहना है कि निर्माण कार्य संज्ञान में है। इसकी अनुमति नगर निगम की ओर से ही दी गई है। इस अस्थाई निर्माण की अनुमति केवल एक दिन के लिए योगा रिट्रीट को दी गई है।
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गंगा में निर्माण कार्य पर पूरी तरह से है रोक
एनजीटी के तीन सदस्यीय कमेटी प्रमुख जस्टिस यूसी ध्यानी के अनुसार गंगा में किसी भी तरह के पक्के और कच्चे निर्माण कार्य पर पूरी तरह से रोक है। एनजीटी के स्तर पर ऐसे निर्माण की मंजूरी कतई प्रतिबंधित है। यदि नगर निगम ने इसकी अनुमति दी है तो मेरे संज्ञान में नहीं है। मंजूरी के लिए कोई प्रावधान होना चाहिए। कामचलाऊ निर्माण के दौरान भी यदि गंगा में गंदगी प्रवाहित होती है तो जुर्माना लगाया जाएगा।