नीलकंठ स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में ताला लटका है। हैरत की बात है कि उच्चाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है। यात्रा की दृष्टि से यह अति महत्वपूर्ण क्षेत्र है। अस्पताल का लाभ नीलकंठ क्षेत्र और आसपास के ग्रामीणों को मिलता है।
बृहस्पतिवार को दिन में एक बजे कुछ रोगी उपचार के लिए पीपलकोटी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के दरवाजों में ताला लटका हुआ था। संपर्क करने पर चिकित्सक का फोन स्विच ऑफ मिला।
ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश समय अस्पताल में ताला लटका रहता है। यदि अस्पताल खुलता भी है तो कभी चिकित्सक तो कभी फार्मासिस्ट नहीं मिलते हैं। अस्पताल में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मी मिलता हैं और वही रोगियों को दवाइयां देता है।
पूछताछ करने पर पता चला कि फार्मासिस्ट मनोरमा रावत एक माह की छुट्टी पर हैं जो 17 अप्रैल को अस्पताल आएंगी। अस्पताल में तैनात बहुद्देशीय कर्मी रोशन लाल भी छुट्टी पर था। अस्पताल में दो योग अनुदेशक तैनात हैं, वह भी अस्पताल में मौजूद नहीं थे।
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कोट
अस्पताल भवन जर्जर अवस्था में है। स्थिति को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने अस्पताल में बैठने के लिए मना किया है। अपराह्न एक बजे अस्पताल भवन में ताला लगाकर अस्पताल के लिए भूमि देखने गई थी। - डॉ. आयुषी चौहान, चिकित्साधिकारी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, नीलकंठ पीपलकोटी
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अस्पताल का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। समय से पूर्व अस्पताल बंद नहीं कर सकते। नीलकंठ पीपलकोटी अस्पताल में समय से पूर्व ताला लटका होने की जानकारी मिली है तो जांच करवाई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. शैलेंद्र पांडेय, जिला आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी