जल संस्थान ऋषिकेश कार्यालय में चिराग तले अंधेरा की स्थिति है। यहां दो साल से ओवरहेड टैंक की सफाई नहीं हुई है। ऐसे में जल संस्थान की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे पानी पर सवाल उठ रहे हैं। यहीं नहीं, कर्मचारियों ने टैंक पर लिखी अगली सफाई की तिथि को ही मिटवा दिया है।
जल संस्थान की ओर से हर साल ओवरहेड टैंकों की सफाई की जाती है। सफाई करने के बाद टैंकों पर अगली सफाई की तिथि अंकित की जाती है। लेकिन जल संस्थान ऋषिकेश ने टैंकों की सफाई करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिसका उदाहरण जल संस्थान के ऋषिकेश कार्यालय परिसर में स्थित ओवरहेड टैंक है।
इस ओवरहेड टैंक की सफाई 2023 में हुई थी। उसके बाद विभागीय अधिकारियों ने टैंक की सफाई की सुध नहीं ली। अब अगली सफाई की तिथि के ऊपर पेंट लगाकर मिटा दिया है। इस टैंक से प्रगति विहार, आशुतोषनगर, इंदिरानगर, रेलवे रोड, देहरादून रोड आदि क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। जब कार्यालय में बने टैंक की सुध नहीं ली तो शहर में स्थित अन्य टैंकों के भी यही हाल होंगे।
...तो कागजों में हो रही ओवरहेड टैंकों की सफाई
- जिस प्रकार जल संस्थान की ओर से अपने कार्यालय परिसर में दो साल से ओवरहैड टैंक की सफाई नहीं की। फिर तिथि मिटा दी। उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कागजों में ही ओवरहेड टैंक की सफाई हो गई होगी।
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दूषित पानी से बीमार होने का बढ़ जाता है खतरा
टैंक में गंदगी और काई जमने से पानी में बैक्टीरिया और कीटाणु पनप सकते हैं, जिससे पानी के दूषित होने की आशंका रहती है। दूषित पानी पीने से बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। नियमित सफाई से टैंक की उम्र बढ़ जाती है और उसके खराब होने की संभावना कम हो जाती है।