नगर निगम में आउटसोर्स से विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के निर्धारित वेतन दरों से भुगतान न होने संबंधी मामले में श्रम विभाग कार्यालय पर सुनवाई हुई। इसमें अनुबंधकर्ता की ओर से सात से दस दिन के समय मांगा गया। मगर, वादी पक्ष की असहमति पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने अनुबंधकर्ता को समय नहीं दिया। उन्होंने उक्त मामले की रिपोर्ट सहायक श्रमायुक्त केके गुप्ता को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में नगर निगम का पक्ष जानने के लिए पत्र देकर दो दिन का समय दिया गया है।
बृहस्पतिवार को श्रम कार्यालय में भारतीय मजदूर संघ की ओर से की गई लिखित शिकायत पर सुनवाई के लिए अगली तारीख लगी। तारीख पर नगर निगम से वार्ता के बाद अनुबंधकर्ता को बात रखनी थी। मगर, तारीख पर मैसर्ज हिमालय इलैक्ट्रिकल्स एंड सिविल इंजिनियरिंग वर्क्स के प्रोपराइटर राजेश कंडवाल की जगह उनकी प्रतिनिधि शीतल पहुंची। उन्होंने श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम छट्ठू के समक्ष एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया। पत्र के जरिए सात से दस दिन का समय मांगा गया। इस पर वादी पक्ष भारतीय मजदूर संघ की ओर से कार्यालय मंत्री राम चंद्र खंडूडी ने असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जा रही है। लिहाजा इतना समय दिया जाना उचित नहीं है।