निगम द्वारा आश्रमों पर टैक्स लगाने का विरोध करते संत
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नगर निगम क्षेत्र के आश्रमों और मठों पर टैक्स लगाने का संत समिति ने विरोध जताया है। निगम की इस वसूली को समिति के अध्यक्ष विनय सारस्वत ने अनुचित ठहराया है। विनय सारस्वत ने कहा कि इससे पूर्व कभी भी आश्रमों और मठों पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया गया। पूर्व में भी नगरपालिका यहां रही है, लेकिन आश्रमों में किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया गया। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश एक धार्मिक नगरी है। यहां लोग योग, अध्यात्म व गरीब विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा के लिए आते हैं। विद्यार्थी वर्ग इन आश्रमों में रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण और आजीविका चलाते हैं।
पूर्व में भी ऋषिकेश के आश्रमों पर कभी टैक्स नहीं लगाया गया, लेकिन इस बार नगर निगम ने टैक्स लगाने का निश्चय किया है, जोकि अनुचित है। संत समिति आश्रमों पर लगाए टैक्स का पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने कहा कि यदि टैक्स लगाने की प्रक्रिया को वापस नहीं लिया जाता है, तो आगामी 24 अगस्त को संत समिति एक बैठक करेगी और मुख्यमंत्री से आश्रमों के टैक्स को बंद करने की मांग करेगी। फिर भी आश्रमों से टैक्स नहीं हटाया जाता तो निगम प्रशासन के विरुद्घ आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।