मुख्यालय से नहीं आ रहे कमानी पट्टे और गियर बाॅक्स, चार बसों का होना है इंजन का काम
रोडवेज मुख्यालय से बसों की मरम्मत के लिए न तो कमानी के पट्टटे आ रहे हैं न ही गियर बॉक्स मिल रहे हैं। लिहाजा अलग-अलग काम के लिए 10 बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। बसों के खराब होने डिपो को प्रतिदिन लाखों रुपये का चूना लगा रहा है।
डिपो की चार बसों के इंजन का काम होना है। एक बस के गियर बाॅक्स में खराबी है, जबकि एक बस अल्टीनेटर खराब है। ये बसें उत्तरकाशी, बदरीनाथ, गोपेश्वर, गुरुग्राम और देहरादून रूट पर संचालित होने वाली हैं। रोडवेज मुख्यालय से पार्ट्स न आने से कारण यह बसें कई दिनों से रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी हैं। छोटी सी खराबी वाली बसों की जैसे-तैसे मरम्मत कर उन्हें रूट पर भेजा जा रहा है। वह भी रास्ते में जवाब दे रही हैं। डिपो की अधिकांश रोडवेज बसों के सीटों के कवर खराब हो रखे हैं। मुख्यालय से कवर से संबंधित सामान न आने से सीट कवरों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
गियर बाॅक्स के अभाव में एक महीने से खड़ी बस
दिल्ली-गोपेश्वर रूट पर संचालित होने वाली रोडवेज बस यूके07 पीए-4197 की प्रतिदिन की आय 40 हजार रुपये है। इस बस का गियर बाॅक्स एक महीने से खराब है। जबकि खुले बाजार से गियर बाॅक्स 40 हजार रुपये में खरीदा जा सकता है। एक महीने में रोडवेज को करीब 10 लाख का चूना लगा चुका है।
हर रोज रास्ते में दे रही जवाब
रोडवेज डिपो की बसों की मरम्मत ठीक ढंग से न होने से डिपो की औसतन दो बसें रास्ते में जवाब दे रही हैं। शनिवार को चंडीगढ़ जा रही रोडवेज की बस रुड़की में खराब हो गई थी। ऐसे में बस को रुड़की डिपो में खड़ा करना पड़ा। वहीं सोनप्रयाग जा रही रोडवेज बस शिवपुरी से वापस आ गई। यात्रियाें को प्राइवेट बसों से आगे का सफर तय करना पड़ा।
डिपो में रोडवेज बसों की मरम्मत के लिए अधिकारी गंभीर नहीं हैं। रोडवेज मुख्यालय से पार्ट्स न आने से डिपाे करीब 10 से 12 बसें खड़ी हैं। जिससे डिपो की आय भी प्रभावित हो रही है। - जगदीश कुमार, क्षेत्रीय प्रतिनिधि, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद
ऋषिकेश डिपो में समय-समय पर मुख्यालय से पार्ट्स भेजे जाते हैं। कई बार जिन पार्ट्स की मांग की जाती है वह मुख्यालय में भी नहीं होते हैं। ऐसे में डिपो में पार्ट्स की कमी हो जाती है। मंगलवार को डिपो में पार्ट्स भेजे जाएंगे। - जेके शर्मा, मंडलीय महाप्रबंधक (तकनीकी) रोडवेज मुख्यालय