अर्द्धकुंभ मेले में नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक पर महालक्ष्मी खूब मेहरबान हुईं। बहती गंगा में डुबकी लगाने में नगर पंचायत भी पीछे नहीं रही। स्वर्गाश्रम नाम के अनुरूप निकाय अधिकारियों ने स्थानीय जनता को स्वच्छ और सुंदर स्वर्गाश्रम बनाने का सपना दिखाया। लेकिन, यह सपना सिर्फ ख्वाब बनकर रह गया। सफाई व्यवस्था के नाम पर क्रय किए गए लाखों के संसाधन निकाय क्षेत्र में जगह-जगह जंक खा रहे हैं। संसाधनों के रख-रखाव करने से अब खुद निकाय के अधिकारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
जनवरी 2016 अर्द्धकुंभ मेले में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक को मेला प्रशासन ने एक करोड़ 75 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। इस बजट से निकाय ने एक ट्रैक्टर, दो ट्रॉली, तीन छोटे लोडर वाहन, दो बिन लिप्टर, एक मिनी जेसीबी, 12 रिक्शा, 70 कूड़ादान, 50 ठेली और 20 कलस्टर बीन आदि सामान खरीद लिए। लेकिन, अब निकाय को जरूरत से अधिक सामान खरीदना भारी पड़ गया। जितने सामान निकाय ने प्रयोग में लाने थे, उनका निकाय सफाई कर्मचारी इस्तेमाल कर रहे हैं।
लेकिन जिनका उपयोग नहीं हो रहा है, वह बीते नौ महीने से निकाय कार्यालय के बाहर हैं। स्वर्गाश्रम ट्रस्ट और राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क भूमि पर जंक खा रहे हैं। मिनी जेसीबी, टैक्टर ट्राली, रिक्शे और कूड़ादान और कलस्टर बीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। 50 हाथ ठेली में सिर्फ 20 का ही उपयोग हो पा रहा है।
इन सामानों का सही तरीके से इस्तेमाल न होने के कारण लाखों रुपये की धनराशि बर्बाद हो रही है। निकाय इसका समाधान करने के बजाय इस ओर मूकदर्शक बनी हुई है। आवश्यकता से अधिक सामान क्रय करने पर अब स्थानीय लोग निकाय के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं।
अर्द्धकुंभ मेले में वास्तव में आवश्यकता से अधिक सामग्री क्रय की गई है। इतने सारे सामान को अंदर रखने के लिए निकाय के पास उचित व्यवस्था नहीं है। - राधेश्याम छाछर, ईओ नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक।