नौ साल बाद भी पशुलोक में गो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान शिलान्यास से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाया है। शिलान्यास के कार्यक्रम में लाखों रुपये खर्च भी किए गए। पर इसके बाद सरकार इस योजना पर काम करना भूल गई। शिलान्यास का पत्थर भी अब यहां झाड़ियों के बीच ओझल हो गया है। शासन-प्रशासन की इस उदासीनता से पशुपालक निराश हैं।
पशुपालकों को आर्थिक स्थिति से मजबूत करने के लिए 18 दिसंबर 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी ने पशुलोक स्थित निर्मल ब्लॉक में गो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान का शिलान्यास किया गया। अनुसंधान संस्थान के लिए 20 एकड़ भूमि भी चिह्नित की गई। उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड के अंतर्गत गोमूत्र संकलन एवं शोधन परियोजना को प्रदेेश स्तर पर लागू कर छोटे-बड़े पशुपालकों को आर्थिक तौर पर मजबूत करना था। योजना के अंतर्गत विभाग के सचल वाहन पशुपालकों के घरों से एकत्र गोमूत्र को निर्धारित मूल्य पर खरीदकर लाते हैं।
इसके बाद गोमूत्र को अनुसंधान में मशीनों और उपकरणों के जरिए तैयार किया जाना था। फिर से गोमूत्र को पतंजलि को निर्धारित मूल्य पर बेचा जाना था। लेकिन, शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते आठ साल, आठ महीने, चार दिन बीतने के बाद योजना को परवान चढ़ाने के लिए निर्धारित भूमि पर लगा शिलान्यास पट झाड़ियों में ओझल हो गया है। बहरहाल, अगर उक्त योजना को शुरू किया जाता है। तो सरकार के साथ पशुपालकों को भी अच्छा मुनाफा होगा। योजना के माध्यम से पहाड़ों से पलायन को रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के आर्थिक स्तर में सुधार लाया जा सकता है।
उक्त योजना मेरे कार्यकाल से पहले की है। योजना की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। योजना काफी किफायती है, लिहाजा, गो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान को खोलने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। - डॉ. एनके शर्मा, निदेशक भेड़ एवं ऊन प्रसार संस्थान पशुलोक