यूजेवीएनएल (उत्तराखंड जल विद्युत निगम) की ओर से चीला जल विद्युत परियोजना के सिविल अनुरक्षण का करीब चार करोड़ रुपये का काम किया गया, लेकिन गंगा से उठाए गए बोल्डर पत्थर की एवज में राल्यटी जमा नहीं की गई। जब ईको विकास समिति कुनाऊ के अध्यक्ष ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो यूजेवीएनएल ने काम पूरा होने के कई महीने बाद राजकोष में 15 लाख रुपये की रायल्टी जमा कराई।
यूजेवीएनएल की ओर से पशुलोक बैराज क्षेत्र में सिविल अनुरक्षण का काम किया गया था। इसके लिए विभाग की ओर से करीब तीन करोड़ 87 लाख 90 हजार 653 रुपये का एग्रीमेंट किया गया था। राजाजी टाइगर रिजर्व की ओर से नदी किनारे काम की अनुमति के लिए तत्कालीन निदेशक पीके पात्रो की ओर से अनुमति दी गई थी। इसमें पार्क से किसी प्रकार की रेत, बजरी, मिट्टी, पत्थर और वनस्पति के किसी प्रकार विदोहन करने पर कार्रवाई की बात लिखी गई थी। यूजेवीएनएल की ओर से काम के दौरान बोल्डर पत्थर नदी से ही उठाए गए, इसके एवज किसी प्रकार की रायल्टी राजकोष में जमा नहीं की गई।
ईको विकास समिति कुुनाऊ के अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह नेगी ने यूजेवीएनएल से सूचना के अधिकार के तहत छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी। इसके बाद यूजेवीएनएल की ओर से इस साल 20 मार्च को 11,79,653 रुपये, तीन जुलाई को 3,41,615 रुपये और सात जुलाई को 1258 रुपये राजकोष में रायल्टी के रूप में जमा किए गए।
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किसी भी काम की रॉयल्टी क्वाटरली जमा होती है। मार्च में फाइनल बिल बने उसके बाद रायल्टी जमा की गई। बैराज से रायल्टी से संबंधित विवरण बनाकर हरिद्वार कार्यालय को भेजा गया है। यह डिटेल एकाउंट विभाग की ओर से दी जाती है। एजीएम ऑफिस की ओर से उसी के अनुरूप रायल्टी राजकोष जमा की जाती है।
- ललित टम्टा, अधिशासी अभियंता (सिविल) यूजेवीएनएल, पशुलोक बैराज