दशकभर पहले उच्चीकृत राजकीय हाईस्कूल राजीवग्राम आज भी उधार के दो कमरों में जैसे-तैसे संचालित हो रहा है। सरकार ने इसे उच्चीकृत तो किया मगर हाईस्कूल को आज तक न तो भवन बनाने को भूमि दी गई और न ही भवन निर्माण का बजट ही मंजूर हो पाया। जिसके चलते क्षेत्र के बच्चे इस स्कूल में दाखिला लेने से कतराते हैं।
उन्हें अन्यत्र इंटर कालेजों में दाखिला लेना पड़ता है। बावजूद इस ओर राज्य सरकार, शिक्षा महकमा और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि उदासीन बने बैठे हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2006 में राजकीय जूनियर हाईस्कूल राजीवग्राम को उच्चीकृत कर हाईस्कूल का दर्जा दिया था। मगर इसके लिए जरूरी संसाधन भूमि और भवन आज तक नहीं दिया गया।
नतीजतन लगभग दस साल से यह स्कूल राजकीय उच्च प्राथमिक बालिका विद्यालय के उधार के दो कमरों में चल रहा है। इसमें से एक कमरे में दसवीं की कक्षा संचालित हो रही है, जबकि विधायक निधि से स्कूल के समीप बनाए गए एक कक्ष में नवीं कक्षा चलाई जा रही है।
स्कूल के पास बच्चों को बैठाने के लिए न तो क्लास रूम हैं और न ही विज्ञान के बच्चों के लिए प्रयोगशाला, लाइब्रेरी का ही प्रबंध किया गया है। जिसके चलते बच्चे जैसे-तैसे प्रयोगात्मक तैयारियां करते हैं। नगर पालिका मुनिकीरेती के घनी आबादी चौदहबीघा राजीवग्राम क्षेत्र में राजकीय हाईस्कूल होने के बावजूद इसमें व्यवस्थागत खामियों के अभाव में महज 54 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं।
जबकि आसपास के क्षेत्र के इससे ज्यादा बच्चे क्लास रूम और अन्य कमियों के चलते समीपवर्ती ढालवाला, कैलासगेट और ऋषिकेश के इंटर कालेजों में दाखिला लेने को विवश हैं।
ग्राम समाज ने दी भूमि, विभाग मांग रहा रजिस्ट्री
स्कूल भवनों के मामले में शिक्षा विभाग के नियम अजीबोगरीब हैं। जिनके चलते बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। राजकीय हाईस्कूल राजीवग्राम का ही उदाहरण लें तो यहां राजकीय जूनियर हाईस्कूल के उच्चीकरण के बाद तत्कालीन ग्राम पंचायत ढालवाला की ओर से साल 2006 में विद्यालय भवन निर्माण के लिए ग्राम समाज की करीब दो बीघा भूमि विद्यालय के नाम प्रस्तावित कर दी गई थी।
मगर शिक्षा महकमा दशकभर बाद भी शिक्षा विभाग भवन निर्माण नहीं करा पाया है। स्कूल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार विभाग इसके लिए उपलब्ध भूमि की रजिस्ट्री की मांग कर रहा है। मगर उपलब्ध कराई गई भूमि की कोई रजिस्ट्री नहीं है। ऐसे में भूमि मिलने के बावजूद विभाग इसके लिए धन आवंटन नहीं करा रहा है। स्कूल प्रशासन कई बार महकमे से गुहार लगा चुका है मगर कोई सुनने समझने वाला नहीं।
अपग्रेड स्कूलों से पिछड़ा राजीवग्राम राजकीय हाईस्कूल
विद्यालय सूत्रों की मानें तो जूनियर हाईस्कूल के साथ ही नीर, खांकर, बडल, तिमली, पजैगांव हाईस्कूल भी उच्चीकृत किए गए थे। इनमें से कुछ हाईस्कूल अब तक इंटर कालेज के तौर पर अपग्रेड किए जा चुके हैं। राजीवग्राम हाईस्कूल को भूमि-भवन नहीं मिलने से यह ठीक से संचालित नहीं हो पा रहा, जिसके चलते इसे फिलहाल अपग्रेड भी नहीं किया जा सकता।
स्कूल भवन नहीं होने से विद्यालय के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। लाइब्रेरी और प्रयोगशाला के बिना बच्चों को पठन-पाठन में दिक्कतें आती हैं। विभाग को भूमि उपलब्ध कराने और भवन के लिए बजट की लगातार प्रस्ताव भेजकर मांग की जा रही है।