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वह तड़पता रहा, अस्पताल प्रशासन मौन

Fri, 15 Apr 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश
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घायल - फोटो : amar ujala
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इसे विडंबना ही कहेंगे कि पृथक राज्य गठन के 16 साल बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर हैं। इसकी बानगी भर हैं ढुंगमंदार, पुजार गांव टिहरी गढ़वाल के 60 वर्षीय दशरथ प्रसाद। घर पर गिरने से उनका बांया पैर फ्रैक्चर हो गया। गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल बौराड़ी, टिहरी गढ़वाल रेफर किया, जहां उन्हें एक दिन भर्ती करने के बाद ऋषिकेश सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया।
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तीन दिन से इलाज के लिए भटक रहे दशरथ प्रसाद और उनके परिजनों को उम्मीद जगी कि ऋषिकेश में मर्ज का इलाज होगा, लेकिन उस वक्त उन्हें फिर मायूस होना पड़ा, जब इमरजेंसी में एक्सरे देखने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने दो टूक जवाब दिया कि यहां हड्डी का डाक्टर नहीं है, इसलिए दून सरकारी अस्पताल जाओ।

जवाब सुनकर दशरथ हकबक रह गए और लड़खड़ाती आवाज में बोले साहब दिहाड़ी मजदूरी कर गुजर बसर करता हूं। पल्ले में इतने पैसे हैं नहीं कि महंगा इलाज कर सकूं। ऐसा अस्पताल बताओ जहां उनकी टांग ठीक हो सके। अब और भटकने की हिम्मत नहीं है। काफी जद्दोजहद के बाद 108 आपातकालीन सेवा से दून अस्पताल भेजा गया।
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पहाड़ में दशरथ प्रसाद जैसे कई बदनसीब हैं, जिनका सरकारी अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में इलाज नहीं हो पाता है। स्वास्थ्य सेवा बेहतर करने के सरकारी दावे खोखले हैं।

गिड़गिड़ाती रही पत्नी
जिला अस्पताल बौराड़ी से बृहस्पतिवार सुबह 108 आपातकालीन सेवा दशरथ प्रसाद को लेकर ऋषिकेश सरकारी अस्पताल पहुंची। साथ में पत्नी डबी देवी और सास अमरादेवी भी थी। इमरजेंसी में स्वास्थ्य कर्मियों ने दून ले जाने की बात कही तो दशरथ की पत्नी गिड़गिड़ाने लगी।

साहब इन्हें ठीक कर दो। बच्चे भी नहीं हैं अकेली मैं क्या करूंगी। उत्तराखंड गरीबों को सताने के लिए बना है। पहाड़ के दूरदराज गांव में इलाज की सुविधा नहीं। लंबा सफर तय कर शहर में आए तो यहां भी बुरा हाल। जाएं तो जाएं कहां। डबी देवी की बातों ने अस्पताल में सभी को झकझोर के रख दिया।
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